Wednesday, January 2, 2019

फेसबुक पर एक संघ के मित्र के सवालों का सिलसिलेवार जबाब

नमस्कार इतना अहंकार अच्छा नहीं होता कोई रावण भी था कंधार मामले में अगर आप से ज्यादा जानकारी नहीं होगी तो कम भी नहीं होगी ये विनम्रतापूर्वक दावा है मेरा आपसे, अब आपके उठाये गए सारे सवालों का जबाब दे रहा हूँ उम्मीद हैं धैर्य पूर्वक पढ़ेंगे और समझेंगे-
पहला सवाल बेल पर है-

जबाब- बेल पर जरूर है पर तड़ी पार नहीं अब आप समझ गए होंगे (अमित शाह).

दूसरा सवाल मिशेल-

जबाब- मिशेल ने 6 महीने पहले हीं बयान दे दिया था कि गाँधी फॅमिली का नाम लेने के बदले में भारत सरकार मुझे सरकारी गवाह बना देगी.

तीसरा सवाल चार सालों में कोई आतंकी घटना नहीं हुई
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जबाब - हिन्दुस्तान के ताज पर आंकी हमला हुआ "उरी" में हमारे जवानों पर हमला हुआ और हमारे २१ वीर शहीद हुए वो भी जल कर इससे बड़ा कोई घटना नहीं हो सकता.

नोट : यह घटना मोदी के नवाज का केक खा कर आने के दो- तीन दिन बाद हुआ (बात थोड़ी महीन है) समझने में वक्त लगेगा.

चौथा सवाल क्वात्रोची और गैस कांड

जबाब - निश्चित रूप से यह बहुत वीभत्स घटना थी और क्वात्रोची विदेश भागा पर उसका मुकदमा लड़ते हुए अरुण जेटली ने उसे माननीय अदालत से बाइज्जत बरी करवाया गलत कौन फूफा या केतली.

पांचवा सवाल भ्रष्टाचार

जबाब - राफेल और फसल बीमा दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला है, फसल बीमा पर मुरली मनोहर जोशी जी की पार्लियामेंट कमेटी की आज की रिपोर्ट ABP News पर प्रकाशित हुई है, पढ़ने की कृपा करे.

अब मेरा एक सवाल राफेल HAL से छीनकर अम्बानी को क्यों गया ?

घोटाले पर लिस्ट बहुत लम्बी है परन्तु कुछ चर्चित नाम इस तरह हैं - 
एक नाथ खड़से किस सरकार  मंत्री थे जिन्हें जमीन घोटाले में इस्तीफा देना पड़ा था (महाराष्ट्र). 
पंकजा मुंडे चिक्की घोटाला, महाराष्ट्र 
बंडारू लक्ष्मण बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष जेल जा चुके है आप बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष रहते हुए रिश्वत लिए थे, आप परम् संघी थे.
कर्नाटक में रेड्डी ब्रदर 
तत्कालीन कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष जेल से बेल पर 
अमित शाह मर्डर में 

हेमंत विश्व शर्मा असम कांग्रेस में भ्र्ष्ट और बीजेपी में आते हीं मोदी जी की तरह साफ-पाक. 

अब आते हैं संघ के चरित्र और चरित्र निर्धारण प्रक्रिया पर-

एक रिपोर्ट के मुताबिक चार जुलाई 1911 को सेल्यूलर जेल पहुंचने के 6 महीने के भीतर सावरकर ने दया याचिका दाखिल की थी। 

अक्टूबर 1913 में वायसराय की कार्य परिषद के सदस्यसर रेगिनाल्ड क्रेडॉल जेल पहुंचकर सावरकर और कुछ दूसरे कैदियों से मिले थे लेकिन बात नहीं बनी।
इसके बाद 14 नवंबर 1913 उन्होंने दूसरी दया याचिका दाखिल की थी।
इसमें उन्होंने लिखा था, 'मैं अपनी पूरी शक्ति के साथ सरकार की इच्छा के अनुसार सेवा करना चाहता हूं..'
पत्र के आखिर में सावरकर ने खुद को सरकार का सकबसे आज्ञाकारी मुलाजिम बताया था।

नोट: 14 मई  2015 को अमर उजाला अखबार में पढ़ा जा सकता है. 

गुरु जी संघ पर मेरे तथ्य आधारित कुछ सवाल है उसका उचित समाधान अवश्य करें- 

अगर आरएसएस समाज निर्धारण का कार्य करती है तो अपने कार्यालयों पर 2001 तक यानी की 52 सालों तक तिरंगा ध्वज बंधन क्यों नहीं किया।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के वक्त आंदोलन से अलग रहकर ब्रिटिश हुकूमत की मदद करने की मंशा क्या थी और नहीं थी तो क्यों भाग नहीं लिए जब कि बोस जी की "आजाद हिन्द फ़ौज" पूरी ताकत के साथ आंदोलन में शामिल थी.

14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि में संविधान RSS ने तिरंगा जलाया और ये बोला गया कि हम इस संविधान को तब तक नहीं मानेंगे जब तक देश हिन्दू राष्ट्र नहीं हो जाता, क्यों ?

राफेल के सवाल पर जबाब पहले दे चुका हूँ- 

राफेल के जबाब में हॉलैंड के बयान का खंडन हमारे प्रधानमंत्री ने नहीं किया है.

सीबीआई पर आपके सवाल का जबाब-
  
सबसे बड़ी जांच एजेंसी के क्रम संख्या एक और दो के अफसरान के बीच जो तू-तू मै-मै पिछले कुछ महीनों से कमरे के अंदर हो रही थी वो सबके सामने निकिल कर सतह पर आ गयी. हाँ आपकी बात सत्य है की माननीय अदालत ने उस समय सीबीआई को पिंजे का तोता कहा था पर अब क्या हो रहा इसका जबाब तो बनता है.

नामदार के सवाल पर जबाब -

हाँ आजकल नामदार और कामदार का जुमला एक पार्टी द्वारा बहुत जोर-शोर से उठाया जा रहा है तो ये पता होना चाहिए कि कोई नाम जुमले बोलने से नहीं बनता उसके लिए काम करना पड़ता है। जो जुमले बोलने जैसा आसान नहीं होता है.

मुझे उम्मीद है कि मेरे वरिष्ठ, मान्यवर आपके सवालों का जबाब तर्कों और तथ्यों के आधार पर मिल गया होगा, इन्ही सवालों को देते हुए मेरे अंतःकरण में कुछ यक्ष प्रश्न उठ रहे है जिन पर तथ्यात्मक और तर्क संगत जबाब का इन्तजार होगा और उसका स्वागत होगा।

जय हिन्द        

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