Monday, December 3, 2018

चुनाव आयोग की विश्वशनीयता का संकट


दिन--दिन चुनाव आयोग के सामने अस्तित्व का संकट गहराता जा रहा है क्योंकि हाल के एक दो सालों में चुनाव आयोग ने चुनाव से सम्बंधित फैसले लेने मे पंगुलता दिखाई है उससे अब रेत पर खींची गयी तस्वीर को साफ़-साफ़ है कि चुनाव आयोग के अंदर क्या घटित हो रहा है उसकी शुरुआत होती है पिछले साल हिमांचल,उत्तराखंड,त्रिपुरा,गुजरात के चुनाव से उस समय हुआ ये कि चुनाव आयोग ने गुजरात को छोड़कर और बचे हुए चुनावी राज्यों की चुनाव तिथि घोषित कर दी और गुजरात का नहीं किया क्योंकि प्रधानमंत्री का गुजरात दौरा बीच में प्रस्तावित था तो चुनाव आयुक्त को लगा की हमारे प्रधानमंत्री गुजरात में चलें जाएँ और वह से जुमला एक्सप्रेस चला कर जब दिल्ली आएंगे तो चुनाव तिथि की घोषणा कर दी जाएगी और हुआ भी ठीक ऐसे ही परन्तु इस कार्य को करने के लिए चुनाव आयोग ने अपनी गरिमा को गिरा दिया.

दूसरी घटनाअक्टूबर को देखने को मिली जो निहायत ही शर्मनाक थी हुआ ये की राजस्थान,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,तेलंगाना और मिजोरम का चुना होना था और चुनाव आयोग ने १२ .३० बजे पत्रकार वार्ता का समय मुक़र्रर किया इसी बीच पता नहीं क्या बदला कि चुनाव आयोग ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को रद्द करते हुएबजे का नया समय पत्रकार वार्ता के लिए तय किया गया  परन्तु शक तो तब यकीन में बदला जब पता चला की प्रचारमंत्री महोदय राजस्थान में चुनावी जुमला एक्सप्रेस को चलाने के लिए गए हुए है फिर तो श्री चुनाव आयुक्त घबरा गए और प्रचारमंत्री की सभा का खत्म होने का इंतज़ार किया और जैसे ही जुमला एक्सप्रेस राजस्थान में दौड़ी वैसी ही इन्होने पत्रकार वार्ता करके चुनाव की तिथि घोषित कर दी,इस एक कृत्य से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.

हम चुनाव सुधारा की प्रकिया और आयोग में जनता का भरोसा जितने वाले पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन को जानते हैं और उनके बारे में पढ़ते हैं तो पता चलता है कि उन्होंने 90 के शुरूआती दशक में चुनावी प्रक्रियाओं में नियम-कानून को मजबूत करते हुए जनता के दिलों में अपार जगह बनाई थी और चुनाव का निर्भीक तरिके से सञ्चालन किया था परन्तु शेषन जी की मेहनत को आज के आयुक्त महोदय ऐसे बर्बाद कर दिए जैसे गंगा में रेत बहा दी जाय,शेषन जी के नाम से चुनाव के समय गुंडे-माफिया दिखाई नहीं देते थे.

परन्तु जब संस्थाएँ हीं सत्ता की गोद में बैठ जाये तो आप और मै,हम क्या करियेगा कुछ नहीं जो सत्ताधारी होगा वो इन्हें अपनी थाप पर नचायेगा और बाहर हम हर-हर मोदी,संविधान बचाओ के नारे लगाएंगे और अंदर हमारा भविष्य मतलब सरकार का भविष्य पहले से हीं निर्धारित हो जायेगा उसके बाद हम फिर से किसी नए नारे को ढूढ़ने लगेंगे.   


1 comment:

  1. #BJP jitna kahti hai #ECI utna hi sunti hai or krti hai

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