Tuesday, December 4, 2018

मनुष्यों के मन में भरता जहर


     आज हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए की हम कोई ऑटोरिक्शा,कैब या परिवहन का साधन किराये पर लेते है और उसका चालक या रख-रखाव करने वाला किसी दूसरे धर्म का निकल जाये तो हम उस साधन को रद्द कर दें और सोशल मीडिया पर उसकी सेखी दिखाए ऐसा तो नहीं होता है और हीं होना चाहिए हम अपने समाज को लेकर किस तरफ बढ़ रहे है,क्या हम अपनी भावी पीढ़ियों के लिए न्याय कर पा रहे है,शायद  नहीं। हमारे देश के जिम्मेदार लोगों को ये जरूर सोचना चाहिए की देखते-देखते कहीं हमारा समाज भेड़िया तो नहीं बनता जा रहा है,और हम उस खतरे को जानते हुए भी कुछ निहित स्वार्थों के लिए हम चुप-चाप तमाशा देख रहे हैं.

      हमारे देश की संस्कृति,वेष-भूसा,रहन-सहन जैसी हर क्रिया में हमारी महानता के अगणित गुड़ प्रदर्शित करता है हम इसे भिन्नताओं में कैसे बाँट सकते है और बाटने की सोच भी कैसे सकते है जब हम अपने देश से बहुत प्यार करते है। हमारा देश फूलों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है जिसमें अनेकों तरह के सुन्दर फूल अपनी मन मोहने वाली खुशबुओं के समेटे हुए है,ऐसे में उस गुलदस्ते से हम किसी एक फूल को कैसे अलग कर सकतें हैं।
        किसी भी त्रुटि के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.
           धन्यवाद,साभार
      



1 comment: