कल जब लंदन से माल्या ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम लिया तब से भाजपा कीसारी बुद्धि खो गयी है और बिना बात पर गला फाड़ कर चिल्लाने वाले फालतू केप्रवक्ताओं का कल से मुंह सील गया है.अब वो समझ नहीं पा रहें है कि क्या करें,ये भीहो सकता है की माल्या का दावा गलत हो परन्तु बीजेपी जब विपक्ष में थी तब केवलऔर केवल कोरी अफवाहों पर हीं राजनीति करती थी कोल,टू जी,जीजा जी और नजाने कितने उपनाम देते थे परन्तु एक भी आरोप को सिद्ध नहीं कर सकें अपनेकार्यकाल के साढ़े चार सालों में,परन्तु जो कल माल्या ने कहा कि मै संसद के सेन्ट्रलहाल में अरुण जेटली से मिला था और उनसे बोला था कि मैं लंदन जाऊंगा तो वित्तमंत्रीने क्या किया उसे क्यों नहीं रोका। इससे यह प्रश्न उठता है कि कही सरकार के वरिष्ठलोगों के निर्देश पर सरकारी तंत्र उसे अनुचित लाभ तो नहीं पंहुचा रहा था.
कुछ महीनों पहले जब राहुल गाँधी ने कहा था कि माल्या देश छोड़ने से पहले सरकारके लोगों से मिला था फिर देश से बाहर गया था तो सारे टीवी,मीडिया,भक्त औरअमर्यादित भाषाओँ के धनी बीजेपी के प्रवक्ताओं ने राहुल गाँधी को उल्टा-सीधा बोलाथा परन्तु अब जब माल्या और जेटली दोनों ने मिलने कि बात को स्वीकार कर लिया वोबेशक अनौपचारिक मुलाकात हो तो क्या देश के लोगों को ये नहीं सोचना चाहिए किराहुल गाँधी जो कुछ भी बोलते है सही तथ्य और जिम्मेदारी के साथ बोलते है न किकिसी गवार और गैरजिम्मेदार ब्यक्ति की तरह.
सरकार को अब देश के लोगों को जबाब देना पड़ेगा क्योंकि सरकार की संलिप्तताअब साफ तौर पर देखी जा सकती है और सरकार के लोगों के अब हाथ-पैर फूल गएहै.जो लोग कहते थे कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सुबूतनहीं है तो वो लोग शायद आज के राजनितिक हालात के बारे में नहीं जानते विपक्ष केपास सरकार के खिलाफ वो सब कुछ पहले से मौजूद था जो आज निकल रहा है चाहेवो राफेल घोटाला हो या माल्या,नीरव,मेहुल या अन्य लोग है.ये मुद्दे विपक्ष के लिएमास्टरस्ट्रोक था इसीलिए इन लोगों ने इसे चुनावी साल के लिए बचा कर रख रखाथा,जिसकी तपिश बीजेपी को आज झुलसा रही है यह मुद्दा अब बहुत दूर तक जायेगाऔर इसका असर पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में भी देखने को मिलेगा जो निश्चिततौर पर सरकार के लिए घाटे का सौदा होगा।
अरुण जेटली जी से अब हर बार यही सवाल पूछा जायेगा कि आपने माल्या से क्याबात किया था और उसे देश से बाहर जाने में क्या कोई मदद की थी अगर कोई मददनहीं तो लुक आउट नोटिस में बदलाव क्यों किया गया.यह प्रश्न माल्या के विदेश भागनेके 10 दिन बाद हीं कांग्रेस के राज्य सभा संसद और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता श्रीप्रमोद तिवारी जी ने बड़ी ही मुखरता के साथ सदन में उठाया था तो उस समयसरकार ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया था परन्तु आज क्या कहेंगे जब सच्चाई लोगोंके सामने आ गयी है,इस मामले में जेटली जी द्वारा सदन में दिए गए गलत भाषण केआधार पर सदन को गुमराह करने का आरोप भी लग सकता है.
Bhai Parliament men mil kr gya tha
ReplyDelete