जैसा कि कुछ समय से देखा जा रहा था हमारे देश में एक प्रश्न शुरू हो गया था और देश की सत्ताधारी पार्टी जिसका नाम भाजपा है. उनके सर्वोच्च नेता एवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हमेशा रैलियों में भाषणों में कहते पाए जाते थे कि कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है. लेकिन बदलते दौर के साथ-साथ उनकी यह बातें एक तरह से जुमला साबित होने लगी हैं. क्योंकि कांग्रेस धीरे-धीरे ही सही देशवासियों के भरोसे को जीतने लगी है. अभी कुछ माह पूर्व हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सत्ता हासिल किया और अब 13 मई को कर्नाटक में भाजपा को कांग्रेस ने बहुत भारी शिकस्त दी है. जहां कांग्रेस 135 सीटों की जबरदस्त बहुमत के साथ सत्ता में आई और आज जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री और डी के शिवकुमार उपमुख्यमंत्री पद का शपथ ले रहें थे. तब वहां पर विपक्ष के तमाम बड़े नेता राहुल गांधी जी, प्रियंका गांधी जी, शरद पवार जी, नीतीश कुमार जी, तेजस्वी यादव जी, सीताराम येचुरी जी, और अनेक विपक्षी नेता मंच पर उपस्थित थे.
अब विश्लेषण किया जाने लगा है कि कांग्रेस को इतनी विशाल जीत किस लिए मिली ? क्या कर्नाटक की जनता भाजपा के भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी थी या कुछ और भी कारण हो सकते हैं ? जहां तक इनके पीछे मेरा मानना है इसमें पहला कारण तो यह रहा कि भाजपा सरकार के ऊपर 40% कमीशन का एक टैग लग गया था. जिसको वहां के स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने जनता के बीच जाकर उठाया इसका खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़ा और दूसरा महत्वपूर्ण कार्य कह रहा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा केरल के बाद सबसे ज्यादा कर्नाटक और कर्नाटक में काफी अच्छा सहयोग मिला था. जिस दिन परिणाम आया उस दिन देखा गया तो जिन क्षेत्रों से राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकली थी. वहां की कांग्रेस ने 75% सीटें जीत ली.
मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष दलित चेहरा हुए कर्नाटक के ही निवासी थे. उनकी छवि आम लोगों के बीच में काफी अच्छी थी. जिसकी वजह से उनके समाज के लोग और दूसरे समाज के लोगों ने भी कांग्रेस को भरपूर समर्थन दिया. जिससे कांग्रस इतना बड़ा बहुमत हासिल कर पाई. कांग्रेस के इस जीत में कुछ कारक और भी रहे हैं. जिसमें सिद्धारमैया जी. जो पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. कर्नाटक में सिद्धारमैया की छवि एक जन नेता की रही है. वह धर्मनिरपेक्ष छवि और धर्मनिरपेक्षता के साथ अपने काम को करते हैं. उनका मुख्य वोट आधार दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक है तथा दूसरा मुख्य कारक ऊर्जावान और कांग्रेस कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डी के शिवकुमार रहे. जो कांग्रेस के लिए हर जरूरत के वक्त एक संकटमोचक की भूमिका में नजर आए. चाहे अहमद पटेल की राज्य सभा सीट का मामला हो या महाराष्ट्र का मामला हो अथवा राजस्थान हो. सभी जगह डीके शिवकुमार ने कांग्रेस आलाकमान के भरोसे को कायम रखा. उन्हीं की वजह से कांग्रेस कर्नाटक में भाजपा के खिलाफ एक नरेटिव सेट कर पाई. जिसका कांग्रेस को फायदा मिला.
कांग्रेस ने जो वहां 5 वादे किए थे उन्हें कर्नाटक की जनता के सामने पूरा करके दिखाना होगा. क्योंकि इनके पास लोकसभा चुनाव तक के लिए बहुत कम वक्त है. अगर जनता को दिए गए वादे कांग्रेस सरकार पूरी नहीं कर पाती है तो उसका खामियाजा भी ने लोकसभा में उठाना पड़ सकता है. यदि अपने किए हुए वायदों को कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले अमल पूरा कर देती है तो उसे 2024 के चुनाव में कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अभी तक कांग्रेस की अपने पूर्ण बहुमत की 4 राज्यों में सरकार है. जिनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक है. इसके अलावा कांग्रेस बिहार, झारखंड और तमिलनाडू में गठबंधन के साथ है। अब धीरे-धीरे कांग्रेस का जनाधार बढ़ रहा है अथवा कहा जाए कि जनता के बीच कांग्रेस और राहुल गांधी की स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है. अब यह देखना होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी तथा विपक्ष के नेता साथ मिलकर 2024 में भाजपा संघ के लिए कितनी बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं ?
No comments:
Post a Comment