Saturday, December 24, 2022

भारत जोड़ो यात्रा का दिल्ली में जलवा

देखते-देखते कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा 108 वें दिन में पहुंच गई। जो केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा से होते हुए आज बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश कर गई। दिल्ली में राहुल गांधी के प्रति लोगों की दीवानगी ऐसी थी कि सड़क के दोनों तरफ आने जाने वाले लोग, वहां के रहवासी अपने घर की छतों एवं सड़कों पर खड़े होकर राहुल गांधी का दीदार कर रहे थे। और उन्हें अपने बीच पाकर एक नेता की कमी की पूरी होने का एहसास कर रहे थे। एक ऐसा राजनेता देशवासियों को चाहिए था जो कि उनके दुःख-दर्द में हमेशा उनके साथ रहे। ऐसा राहुल गांधी को देख कर के वहां के निवासियों ने समझा। राहुल गांधी की यात्रा आश्रम, आईटीओ से होते हुए लाल किले तक पहुंची। लाल किला यात्रा पहुंचने पर राहुल गांधी जी ने एक स्टेट्समैन की तरह भाषण दिया और नफरत को दूर और मोहब्बत करने का पैगाम दिल्लीवासियों को दिया।
वैसे तो लाल किला पहुंचने से पहले राहुल गांधी का आज ही राजघाट और अटल जी के समाधि पर पुष्प अर्पित करने एवं उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का कार्यक्रम था। लेकिन कल 25 दिसंबर है, जैसा कि हर कोई जानता है अटल जी का जन्म दिवस है। जो अब हमारे बीच में नहीं है। उसे देखते हुए राहुल गांधी ने राजघाट और अटल समाधि जाने का अपना प्लान बदल दिया। जो संभवतः कल राजघाट जाएंगे। जहां महात्मा गांधी और सदैव अटल बिहारी वाजपेई जी को अपना श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इन सब बातों को अगर हम जोड़कर देखें तो पाएंगे कि राहुल के साथ कदमताल करते हुए लोग बेल्लौस जुड़ते जा रहे हैं। यह सिलसिला बदरपुर बॉर्डर से शुरू होकर लाल किले तक निरंतर जारी रही। राहुल पूरी यात्रा के दौरान जो भी अभी तक किया है 2800 किलोमीटर की। उसमें उन्होंने जन सरोकार के मुद्दों को प्रखरता एवं प्रमुखता से उठाए हैं और लगातार उसको आगे बढ़ाते जा रहे हैं। राहुल अपने उठाए हुए मुद्दे पर लगातार कायम हैं।
इस भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी एक तरफ अपनी बनाई गई छवि को तोड़ पाने में सफलता हासिल कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ लोकप्रियता हासिल करते जा रहे हैं। राहुल की "पप्पू" वाली छवि को संघ, सरकार और मीडिया ने बहुत दिनों तक एक दुष्प्रचार के माध्यम से स्थापित किया था कि राहुल गांधी गंभीर नेता नहीं है, उन्हें संघर्ष करने नहीं आता, वह कभी दो-तीन महीने टिककर देश में रह नहीं सकते, विदेश घूमने चले जाते हैं। इन सब बातों को धता बताते हुए इस यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी ने उन सभी को एक करारा जवाब दिया है। और देश के जनमानस के मस्तिष्क में अपने लिए, अपने स्वरूप के लिए एक नया विमर्श बनाने पर मजबूर कर दिया है। अब हमें देखना होगा किस देश के लोग उनके इस रूप को कैसे लेते हैं? लेकिन एक बात तो तय है राहुल की इस यात्रा में महिला, बुजुर्ग, बच्चे, नौजवान, बुद्धिजीवी, स्वयंसेवी संगठन, सिविल सोसाइटी के लोग भारी मात्रा में जुड़ रहे हैं। यह ऐसे लोग हैं जिन्होंने हमेशा गैर कांग्रेस सरकार की आवाज उठाई थी। लेकिन अब जनमानस को भी सोचना चाहिए जिन्होंने कभी कांग्रेस को पसंद नहीं किया, वह कांग्रेस के साथ क्यों जुड़ रहे हैं ? इसके कितने व्यापक निहितार्थ निकाले जा सकते हैं। इस यात्रा में जिस तरह से लेफ्ट, कम्युनिस्ट और समाजवादी पृष्ठभूमि के लोगों का जुड़ाव हो। वह कुछ सोच को लेकर हीं तो हो रहा होगा।
देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं। जिसमें बुद्धिजीवी और सिविल सोसाइटी के लोग भी हैं। जिन्हें अब इस सरकार की गलती का एहसास हो रहा है। 2012-13 में जिन लोगों ने भी अन्ना आंदोलन के वक्त कांग्रेस की खुलकर के खिलाफत की थी। आज वह लोग भी अपने आप को गलत मानते हुए फिर से कांग्रेस के साथ कांग्रेस के मूल्यों के साथ अपने आप को जोड़ रहे हैं। यह भारत जोड़ो यात्रा की सफलता है, इसके अलावा आप सफलता के पैमाने और क्या कर सकते हैं ? जाहिर सी बात है जो इस समय सत्ता में है जैसे भाजपा की सरकार या मोदी की सरकार के नाम से हम जानते हैं। वे लोग यात्रा को सफल क्यों मानेंगे ? ठीक उसी तरह जब अन्ना आंदोलन के वक्त कांग्रेस के कुछ मुट्ठी भर नेता उस आंदोलन को छोटा बता रहे थे। लेकिन उस समय भी कांग्रेस के भीतर कुछ ऐसे नेता थे, जिनमें दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश और भी बहुत नाम है। उन्होंने कहा था कि यह सब आंदोलन संघ द्वारा प्रायोजित है। जिनकी बात बाद में सही निकली। 


अन्ना आंदोलन से जुड़े हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि इसमें संघ ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसके बाद हम और आप सब देख रहे हैं कि दिल्ली के अंदर आम आदमी पार्टी का उदय हुआ। जो कि उसी आंदोलन अन्ना आंदोलन की पैदाइश है और केजरीवाल जी जो उस समय अन्ना जी के बाद प्रमुख आंदोलनकारी हुआ करते थे। वह मुख्यमंत्री बने हुए हैं। लेकिन जनता वहीं की वहीं खड़ी है। उस वक्त साथ देने वाले अब समझ रहे हैं कि उन्होंने लोकतंत्र के साथ कितना बड़ा मजाक किया था ? कांग्रेस से शिकायत हो सकती है। सरकारों से शिकायत हो सकती है। लेकिन जो सर्व समावेशी हो उस से शिकायत कैसे हो सकती ?
राहुल गांधी जी आज उसी रास्ते पर हैं जिस रास्ते पर कभी महात्मा गांधी जी चला करते थे। यहां पर राहुल गांधी और महात्मा गांधी जी की तुलना करना बेमानी होगी। क्योंकि महात्मा गांधी जी तो महात्मा थे। राहुल गांधी जी अपने देश के प्रति एक जिम्मेदारी मानते हुए एक लंबी यात्रा पर निकले हैं। और वह सफलता की ओर अग्रसर है। जो 26 जनवरी 2023 को श्रीनगर में ध्खवजारोहण के बाद खत्म होगी। श्रीनगर में ध्वजारोहण किया जाएगा और उसके बाद वहीं से भारत जोड़ो यात्रा की समाप्ति की घोषणा कर दी जाएगी। मुझ जैसे लोगों को यह उम्मीद है कि इस यात्रा की समाप्ति के बाद राहुल गांधी अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। अभी दक्षिण से उत्तर की यात्रा के बाद पूर्व से पश्चिम की यात्रा भी करेंगे। जिसमें देश के छूटे हुए प्रदेश शामिल किए जाएंगे।इस तरह मैं अपने शब्दों को विराम देते हुए कांग्रेस को और राहुल गांधी को इस यात्रा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

जय हिंद
जय भारत 
जय कांग्रेस

Sunday, December 4, 2022

भारत जोड़ो यात्रा एम पी से पहुंची राजस्थान

राजस्थान में हो रहे गहलोत पायलट के झगड़ों के बीच आज शाम राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आखिरकार राजस्थान में प्रवेश कर हीं गयी. राजस्थान में कांग्रेस भाजपा से राजनैतिक लड़ाई तो लड़ हीं रही है और साथ-साथ दो खेमों  में बटी राजस्थान सरकार अपनों से भी लड़ रही है. एक तरफ गहलोत समर्थक अपने अनुभव की बता करते हैं तो दूसरी तरफ पायलट समर्थक युवा तुर्क की बात करते हैं. कांग्रेस चक्की के दो पाटों की तरह पिस रही है.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान हिंदी क्षेत्र का तीसरा राज्य है.जहां भारत जोड़ो यात्रा जारी है. एक्सपर्ट की तमाम आशंकाओं को खारिज करते हुए हिंदी भाषी क्षेत्र में भी यात्रा कमाल कर रही है. अपने पूरे दम-खम के साथ यात्रा चल रही है. राहुल गाँधी यात्रा की शुरुआत से हीं कहते आ रहे हैं कि उनकी यह यात्रा गैर-राजनितिक है. लेकिन एक बात जान लेनी बहुत जरूरी है कि राजनिति करने वाले लोग गैर-राजनैतिक कुछ भी नहीं करते. और इसमें कोई बुराई भी नहीं है.

हम जैसे लोग अपने आपको भाग्यशाली मानते हैं कि हमने तो महात्मा गांधी जी की यात्रा नहीं देखी लेकिन राहुल गांधी की यात्रा देख रहें हैं. राहुल की भारत जोड़ों यात्रा की यदि सच्चे मन से विवेचना किया जाय, तो ये पता चलेगा कि यात्रा एकसमुद्र की तरह विशाल रूप ले चुकी है. जिसमें गावों, कस्बों और बड़े-बड़े शहरों से लोग जुड़ते हुए यात्रा को मुकम्मल बना रहे है और इतिहास में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं. भारत जोड़ों यात्रा लगभग दो हफ्तों तक राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरेगी. उम्मीद है विगत राज्यों की भाँति भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में सफलता का एक नया कीर्तिमान रचेगी.