दो दिन पहले लखीमपुर खीरी में किसानों के साथ हुए बर्बरता के संदर्भ में कांग्रेस प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्षी आवाज को बुलंद किया हुआ है। प्रियंका गांधी की मेहनत को धार देने के लिए राहुल गांधी भी आज लखीमपुर खीरी जा रहें हैं। राहुल दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वह लखीमपुर खीरी जा रहे हैं। जैसे हीं उन्होंने लखनऊ एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरे। ये खबर योगी आदित्यनाथ के प्रशासन को लगी। उन्होंने तुरंत आनन-फानन में लखनऊ में निषेधाज्ञा लागू कर दिया। इसके बाद जब राहुल गांधी को लखीमपुर खीरी जानें से रोकने का प्रयास हुआ तो वह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेष बघेल के साथ एअरपोर्ट परिसर में हीं धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री "टेनी' के काफिले से कुचल कर मारे गए किसानों को अपनी श्रद्धांजलि भेंट करने जाने वाले थे। इस घटना का विवरण मेरे इसके पहले वाले ब्लॉग में पढ़ने को मिल जाएगा। परमिशन मिलने के बाद राहुल गांधी प्रशासन के साथ लखीमपुर खीरी के लिए निकले। लेकिन वह पहले सीतापुर के अस्थाई जेल में कैद अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से मिले फिर साथ में उनको लेकर किसानों के घर पहुंचे और उनका दर्द साझा किया। हिन्दुस्तान की राजनीति में राहुल गांधी एक विलक्षण प्रतिभा के नेता हैं। उनके ब्यक्तित्व को खराब करने में संघ/भाजपा ने बहुत बार कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी के आभामंडल को वो धूमिल नहीं कर पाए। किसानों के हक में आवाज राहुल गांधी ने अपनी केन्द्रीय सरकार के दौरान भी उठाया था और वो जगह उत्तर प्रदेश का भट्टा परसौल गांव था। इसलिए लखीमपुर खीरी के मामले में राहुल की राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्हें एक जन हितैषी लड़ाके के रूप में जानने की कोशिश की जानी चाहिए।
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