Wednesday, October 6, 2021

लखीमपुर खीरी में राहुल गांधी

दो दिन पहले लखीमपुर खीरी में किसानों के साथ हुए बर्बरता के संदर्भ में कांग्रेस प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्षी आवाज को बुलंद किया हुआ है। प्रियंका गांधी की मेहनत को धार देने के लिए राहुल गांधी भी आज लखीमपुर खीरी जा रहें हैं। राहुल दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वह लखीमपुर खीरी जा रहे हैं। जैसे हीं उन्होंने लखनऊ एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरे। ये खबर योगी आदित्यनाथ के प्रशासन को लगी। उन्होंने तुरंत आनन-फानन में लखनऊ में निषेधाज्ञा लागू कर दिया। इसके बाद जब राहुल गांधी को लखीमपुर खीरी जानें से रोकने का प्रयास हुआ तो वह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेष बघेल के साथ एअरपोर्ट परिसर में हीं धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री "टेनी' के काफिले से कुचल कर मारे गए किसानों को अपनी श्रद्धांजलि भेंट करने जाने वाले थे। इस घटना का विवरण मेरे इसके पहले वाले ब्लॉग में पढ़ने को मिल जाएगा। परमिशन मिलने के बाद राहुल गांधी प्रशासन के साथ लखीमपुर खीरी के लिए निकले। लेकिन वह पहले सीतापुर के अस्थाई जेल में कैद अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से मिले फिर साथ में उनको लेकर किसानों के घर पहुंचे और उनका दर्द साझा किया। हिन्दुस्तान की राजनीति में राहुल गांधी एक विलक्षण प्रतिभा के नेता हैं। उनके ब्यक्तित्व को खराब करने में संघ/भाजपा ने बहुत बार कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी के आभामंडल को वो धूमिल नहीं कर पाए। किसानों के हक में आवाज राहुल गांधी ने अपनी केन्द्रीय सरकार के दौरान भी उठाया था और वो जगह उत्तर प्रदेश का भट्टा परसौल गांव था। इसलिए लखीमपुर खीरी के मामले में राहुल की राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्हें एक जन हितैषी लड़ाके के रूप में जानने की कोशिश की जानी चाहिए।

Tuesday, October 5, 2021

प्रियंका गांधी

लखीमपुर खीरी में हुए किसानों के साथ बर्बरता के संबंध में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय कुमार लल्लू और संदीप सिंह फिलहाल चालीस घण्टों से पुलिस की गिरफ्त में हैं। इन नेताओं की गिरफ्तारी का कोई वाजिब ज़बाब पुलिस की तरफ से नहीं आया है और न हीं इतने घण्टों की गिरफ्तारी के बाद इन नेताओं को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। इस तरह का आरोप खुद प्रियंका गांधी जी ने चिट्ठी लिखकर लगाया है। किसानों के साथ जितना क्रूर मजाक इस पापी भाजपा सरकार ने किया है, शायद इतिहास में उतना बड़ा पाप अंग्रेजी हुकूमत ने भी नहीं किया होगा।

आज उत्तर प्रदेश में किसानों की हक की लड़ाई में केवल कांग्रेस और प्रियंका गांधी वाड्रा हीं विपक्ष का सबसे बड़ा और विश्वसनीय ब्रांड बनकर उभरी हैं। कांग्रेस पार्टी किसानों की आवाज को आमजन तक बहुत आक्रामकता के साथ रख रही है। बीजेपी बेशक इसे विपक्ष की राजनीति कहे उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि अगर ऐसी राजनीति होती है तो वो देश और समाज के लिए शुभ हैं। यहां पर सरकार की तमाम शिथिलता जनता के सामने आ रही है।

इस किसान हत्याकांड में चार किसानों समेत आठ लोगों की हत्या की गई है। ऐसी खबर तमाम चैनलों और अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। लेकिन इन सब के बीच अखिलेश यादव और मायावती के नदारद रहने की भरपाई कांग्रेस और प्रियंका गांधी ने पूरा किया। किसानों की हत्या आने वाले चार महीने बाद होने वाले चुनाव में बीजेपी को बहुत नुकसान पहुंचाने वाला है। कांग्रेस और विपक्षी दल इस समय पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ा है और संघ/बीजेपी मुखौटे के पिछे छिपने की कोशिश में हैं।

गिरफ्तारी के दौरान सीतापुर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लिखा गया कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी का पत्र-





Monday, October 4, 2021

लखीमपुर खीरी

कल शाम मोदी कैबिनेट विस्तार में मंत्री बने टेनी जी ने अपने गृह क्षेत्र में सरकारी किसान सम्मेलन का आयोजन किया था। जिसमें प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी आने वाले थे। जिसकी भनक उस क्षेत्र के सच्चे किसानों को लगी। तो उन्होंने हेलीपैड को घेर लिया और यह सुनिश्चित किया कि मौर्य जी का विमान वहां उतर न सके। इतना सब होता रहा और किसानों और बीजेपी समर्थकों के बीच विवाद बढ़ता गया। दोपहर बाद एकाएक खबर आती है कि लखीमपुर खीरी में तीन किसानों की गाड़ी से कुचलने से मौत हो गई और अब उसकी संख्या बढ़कर दस तक हो गई है। जिसमें किसान और बीजेपी समर्थक भी शामिल हैं। जिस गाड़ी से रौंदने की खबर मिल रही है वो गाड़ी मंत्री जी के बेटे की थी। अतः कथित आरोपी मिश्रा जी के बेटे पर आरोप यह लगा कि वही गाड़ी चला रहे थे। गाड़ी से कुचलने के बाद उन्होंने बन्दूक और गोली भी चलाया और भागते बने। 
किसानों की हत्या की खबर देश भर में आग की तरह फ़ैल गई। तमाम राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के लोग लखीमपुर खीरी जानें का ऐलान कर दिया। जिस वजह से शासन-प्रशासन के हाथ- पांव फूल गए। सभी नेताओं को सरकार पुलिस का उपयोग करते हुए नजरबंद या हाउस अरेस्ट करने लगी। लेकिन इनमें प्रियंका गांधी लड़ते-झगड़ते लखनऊ कौल निवास से निकल कर सीतापुर तक पहुंचने के बाद तड़के सुबह हिरासत में ले ली गई। अब तक वो हिरासत में हीं हैं, जबकि अखिलेश यादव समेत दूसरे राजनैतिक लोगों को रिहा कर दिया गया।
भाजपा की शासन में हीं क्यों किसानों के उपर इतने अत्याचार होते हैं ? ये कोई पहला अवसर नहीं है जब बीजेपी सरकार ने किसानों के उपर अत्याचार किया हो। इससे पहले 2018 मे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने 'मन्दसौर' में किसानों के उपर गोलियां चलवाई थी। जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा किसान शहीद हुए थे और किसानों पर गोली किसी नेता-मन्त्री का बेटा या समर्थक नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की पुलिस ने चलाई थी। वो जख्म अभी भरा नहीं था कि उत्तर प्रदेश को फिर वही देखना पड़ा। जो हमारे लिए शर्म की बात है।