5 सितंबर को किसानों ने मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत का आयोजन किया। जिसमें अनुमान के मुताबिक पांच लाख से ज्यादा किसानों ने भाग लिया और एक सफल आयोजन पूरा किया इसके साथ हीं हिन्दू-मुस्लिम एकता को मजबूत बनाया । जो 2013 के दंगों के बाद पूरी तरह टूट चुका था। उसे इस किसान महापंचायत ने फिर से जोड़ दिया। किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और सरकार अपनी घमंड में मशगूल है। मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत में भाईचारे को मजबूत करने वाला एक अद्भुत नजारा देखने को मिला जहां मंच पर किसानों के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे नरेश, राकेश टिकैत बंधु ने मंच से "अल्लाह हू अकबर और हर हर महादेव" का नारा एक साथ लगाया । यह दृश्य मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से लगभग गायब हीं हो चुका था। जिसका भरपूर राजनैतिक फायदा संघ/भाजपा ने उठाया था और केन्द्र समेत उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई।
वैसे इस मोदी सरकार को अपने दोनों सरकारों के दौरान बहुत हीं कम बार परेशानी का सामना करना पड़ा है। उनमें कृषि कानून और किसान दोनों टर्म की सरकारों को नाकों चने चबवा दिए। पहली बार सत्ता में आने के बाद एक बार और संघ/भाजपा की सरकार ने कृषि कानून बदलने का निर्णय लिया था जिसे "धरती पुत्रों" ने अपने पराक्रम के बल पर सरकार को नया कृषि कानून रद्द करने तथा घुटनों पर आने को मजबूर कर दिया था। ठीक उसी प्रकार दूसरे कार्यकाल में भी मोदी सरकार ने कृषि कानून को बदल दिया है और आज भी विगत नौ महीनों से किसान नव ऊर्जा के साथ आन्दोलन के मोर्चे पर डटे हुए हैं।
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