नये कृषि कानून को लेकर मचे घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई चल रही है। इस सुनवाई में कोर्ट ने मोदी सरकार पर सख्त रूख अख्तियार करते हुए बहुत हीं बड़ी टिप्पणी की। SC ने केन्द्र सरकार को किसान कानून पर लगाई कड़ी फटकार - माननीय अदालत ने कहा कि यदि सरकार कृषि कानून पर रोक नहीं लगाती है तो अदालत रोक लगायेगी। किसानों के आंदोलन के संबंध में माननीय अदालत ने कहा कि हम किसानों को प्रदर्शन से नहीं रोकेंगे. किसान आंदोलन जारी रखना चाहें तो जारी रख सकते हैं।
इससे पहले कोर्ट ने सरकार पर कभी भी इतना तल्ख टिप्पणी नहीं की थी। कोर्ट ने बुजुर्ग किसान और उनकी मौतों के उपर भी सरकार से सवाल कर रही है। जिस पर सरकार को कोई ज़बाब नहीं सूझ रहा है। सरकार बैकफुट पर है। कोर्ट ने सरकार के बारे में बोला कि हम आपके ब्यवहार से बहुत निराश है, आप असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं ? माननीय अदालत की तल्ख टिप्पणी के बाद भी सरकार अपनी दलील को बेशर्मी से रखें जा रही है।
केन्द्र सरकार को ये मान लेना चाहिए कि किसानों की ये लड़ाई अदालत में सुनवाई और पेशी की नहीं है। यह लड़ाई उनके भविष्य और उनके सम्मान की लड़ाई है। आज सर्वोच्च अदालत में केन्द्र सरकार के वकील जी दलील दे रहे थे कि उत्तर भारत के तीन प्रदेशों के किसान हीं क्यों आन्दोलन कर रहे हैं ? दक्षिण भारत के किसान क्यों आन्दोलन नहीं कर रहे हैं ? तो उनकी नासमझी के लिए मैं बता दूं कि इस आंदोलन में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के भी किसान भाई भी शामिल है। और दक्षिण के किसानों का रेल सेवा बाधित होने के बाद यहां तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है। दूर-दराज के किसान भी अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं। लेकिन उसे देखने के लिए अहम का चश्मा उतार फेंकना पड़ेगा। कल हरियाणा के मुख्यमंत्री अपने गृह जिले में 'किसान पंचायत' नहीं कर पाए। इससे बड़ी जलालत और क्या होगी संघ की सरकार के लिए। किसान भाइयों का शोषण नहीं होना चाहिए और तत्काल किसान भाइयों को विश्वास में लेकर केन्द्र सरकार को उनकी बात मान लेनी चाहिए। वर्ना कुर्सी वहीं देते हैं और उतार कर फेंक भी देते हैं। जैसा कि पिछली सरकारों ने देखा भी है।
फिर भी इन बेशर्मों को शर्म कहां ?
#कृषि_निजीकरण_बंद_करो
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