आज बीतने जा रहा साल 2020 अपने आप में अनेक घटनाओं को समेटे हुए था। जो हमारे देश के साथ हीं साथ पूरे विश्व जगत के लिए कष्टकारी सिद्ध हुआ। आज मैं उन्हीं कुछ अहम घटनाओं का अपने विवेकानुसार जिक्र करूंगा।
कोरोना का भारत आगमन - कोरोना जो आज तक नहीं गया और समाज के लिए नासूर बना हुआ है। उसका आगमन केरल में सबसे पहले जनवरी महीने में हीं हो चुका था। तब तक पूरा चीन, अमेरिका और यूरोप इस लाईलाज बिमारी की बहुत बुरी गिरफ्त में पहुंच चुका था। राहुल गांधी ने जनवरी महीने में हीं सरकार से कोरोना के प्रभाव पर अपनी चिंता जाहिर की थी। जिसे सरकार समेत केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जी द्वारा राहुल गांधी का पूर्व की भांति उपहास उड़ाते हुए खारिज कर दिया। सरकार की उस गलती का परिणाम ये रहा कि करोड़ों लोगों ने रोजगार गवां दिये और हिन्दुस्तान के इतिहास में जीडीपी ने रिकार्ड 23 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की। कोरोना आज तक लाईलाज बीमारी बनी हुई है। कोरोना के गिरफ्त में करोड़ों देशवासी आये और डेढ़ लाख से ज्यादा ने अपने जान गवाएं। सरकार की लापरवाही का नतीजा हमें अपनी-अपनी नौकरियों को खोकर चुकाना पड़ा।
एम पी में सिंधिया की कांग्रेस से गद्दारी और भाजपा की सवारी - फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में हीं महज 15 महीने बाद कांग्रेस नीत कमलनाथ की सरकार को हटाने की पटकथा केन्द्र के इशारे पर सिंधिया ने लिख दी थी। सिंधिया ने सरकार में शामिल अपने 22 समर्थक विधायकों को भाजपा शासित कर्नाटक के होटल में भेज दिया। काफी कश्मकश के बाद सिंधिया ने अपने समर्थकों का विधानसभा से इस्तीफा करवा कर बीजेपी को बहुमत प्राप्त करना दिया और खुद भी भाजपाई बन गये और भाजपा से राज्यसभा सांसद बने। सिंधिया की गद्दारी साल की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक है।
लाकडाउन का पहली बार इस्तेमाल - मार्च के महीने में जैसे हीं जोड़-तोड़ कर मध्य प्रदेश में सिन्धिया की गद्दारी से बीजेपी ने अपनी सरकार का गठन किया। ठीक उसी के दो-तीन दिन बाद केन्द्र सरकार ने 22 मार्च को एक दिन के लाकडाउन की घोषणा किया। वह लाकडाउन ऐसा था जब सामान्य सरकारी आदेश से रेल, मेल, बस, ट्रक, स्कूटर, साईकिल, प्लेन यहां तक कि पैदल आवागमन भी बन्द कर दिया गया था। जहां पर इंसानों के ऊपर पुलिस का पहरा बिठा दिया गया था। एक-एक करके सम्पूर्ण लाकडाउन को ४५ दिनों तक बढ़ा दिया गया. जिस दौरान देश के सारी गतिविधियां मानों सिमट कर के हीं रह गयी हों. इस दौरान खुशी और मातम मनाने पर भी सरकार का पहरा था.
ताली-थाली बजाकर कोरोना भगाने का बेहूदा ज्ञान और प्रचार - सम्पूर्ण लाकडाउन लगनेे और कोरोना वाायरस के विकराल रूप धारण करने के बाद सरकार खासकर प्रधानमंत्री जी ने देश को सम्बोधित करते हुए कहा कि ताली-थाली बजाइये। जिससे की जनसेवा में लगे हमारे भाई-बहनों का उत्साहवर्धन हो सके. प्रधानमत्री जी के इस कथन को देश की जनता ने ब्रम्ह वाक्य की तरह लिए. और पूरा देश मिलकर खूब ताली-थाली बजाया। प्रधानमंत्री जी के इस कथन के बाद बीजेपी का बगलबच्चा संगठन के पधाकारियों और भक्तों ने इसे मोदी जी का कोरोना भगाने का मंत्र कह कर गांव और कस्बों में खूब प्रचारित किया। लेकिन कोरोना और बिकराल से धारण कर लिया।
समस्त देश से श्रमिकों का अपने-अपने गृह राज्यों को पलायन - इस दौरान देश को एक अभूतपूर्व तस्वीर को देस्खना पड़ा. जो अत्यंत पीड़ादायक था. १५ दिन के लकडाउन का पहला चरण समाप्त होने तक देश के नागरिकों में एक दृढ विश्वास था कि मोदी जी कुछ चमत्कार जरूर करेंगे और सब चंगा हो जायगा। उसके बाद हमारी जिंदगी फिर से आम हो जायेगी। हमारी दिनचर्या पूर्व की भाँति फिर से पटरी पर लौट आएगी। लेकिन जैसे हीं मोदी जी ८ बजे सायं को टीवी पर अवतरित हुए और घोषणा किये कि दो हफ्ते के लिए आपको और अपने घरों में कैद रहना पड़ेगा। मानों तब भक्तों और नागरिकों का सब्र जबाब देने लगा. उस स्थिति में देश के विभिन्न शहरों से बहुत बड़ी मात्रा में पलायन शुरू हो गया. क्या दिल्ली, क्या पंजाब, क्या मुंबई, क्या बंगलौर। सब जगह से श्रमिक अपने-अपने घरों को पलायन कर लिए.
इस दरम्यान सबसे दुःख की बात ये रही कि परिवहन के सरे साधन बस, रेल, हवाई सेवा, ऑटो सब बंद थे. तो लोग पैदल हीं सड़कों पर उतर पड़े और हजार-हजार किलोमीटर की यात्रा २०-२० दिनों में पूरी किये। इस दौरान दूध मुंहे बच्चों को कोई माँ अपने चिपका कर पैदल सड़क पर चल रही थी तो कहीं नंगे पाँव कोई बच्चा डगमगाते हुए क़दमों से चलकर अपने माता-पिता का साथ दे रहा है. इन बेचारों के पास खाने को एक दाना भी नहीं होता था न पीने को पानी। नोएडा से दिल्ली, लखनऊ से पटना, मुंबई से पटना की सड़कों पर पैदल, ठेले और साईकिल से चलने वालों रेला लगा हुआ था. उनका कष्ट देखकर समाज के लोग और पुलिस वाले भी रो पड़ते थे. इस सफर के दौरान पुलिस के बहादुर जवानों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने इन जरूरतमंद राहगीरों की बहुत मदद करी. सिविल सोसाइटी के सहयोग से पुलिस के जवानों ने जगह-जगह खाने, पानी, दवा और कुछ हद तक परिवहन की ब्यवस्था की. हफ्तों तक ये सिलसिला अनवरत सड़कों पर चलता रहा और हमारे सिविल सोसाइटी के लोग तथा पुलिस के जवान बिना थके उनकी सेवा में लगे रहे. एक बार आप लोगों को भी सलाम।