Thursday, June 11, 2020

आरक्षण हमारा संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है

आरक्षण हमारा जन्मसिद्ध तो नहीं परन्तु संवैधानिक अधिकार है। संघ तो हमेशा से हीं आरक्षण के खिलाफ रहा है। लेकिन एक पिछड़े, अति पिछड़े, अनूसूचित जाति, अनूसूचित जनजाति और ट्राइबल लोगों का सामाजिक हक है। जिसकी रक्षा करना हम सामाजिक रूप से कमजोर लोगों का पहला और अंतिम हक है। अगर आज हम आरक्षण की हिफाजत करने में असमर्थ रहते हैं। तो हमारी आने वाली पिढ़ियां और गर्त में चली जायेंगी। जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की आज की टिप्पणी बहुत हैरान करने वाली रही है। संविधान ने आरक्षण के माध्यम से वंचितों को बराबरी का अधिकार दिया है। आरक्षण की वजह से हीं ग्रामीण आंचल में बसे झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों से आने वाले सामान्य पृष्ठभूमि के लड़के और लड़कियों ने यू पी एस सी की परीक्षा सफलता पूर्वक पास किया। आरक्षण कोई खैरात नहीं है। यह हम देशवासियों का पहला मौलिक अधिकार है।


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