Sunday, May 10, 2020

मां

मां सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्माण्ड का ज्ञान है।मां के चरणों में दण्डवत रहें तो आप हमेशा कष्ट से महफूज रहेंगे। कुछ बरस से ये रिवायत चली आ रही है कि कुछ लोग जिनकी संख्या बहुत है। वो सोशल मिडिया के माध्यम से मां के प्रति अपने प्यार और सम्मान दिखा रहे हैं। जो अच्छी बात है। ऐसा नहीं कि पहले के लोग अपनी मां से प्यार नहीं करते थे। लेकिन पहले के लोग दिखावा नहीं करते थे। उस जमाने की बात को पुख्ता करने के लिए सबसे प्रमुख बात ये थी कि उनके वक्त में कोई वृद्धाश्रम नहीं होता था। मां दुनियां की इकलौती ऐसी इंसान हैं। जो बिना निज स्वार्थ के अपने बच्चों के लिए आठों पहर समर्पित रहती है। "मां" को किसी शब्द के माध्यम से परिभाषित नहीं किया जा सकता है। मां खुद भूखे पेट रहकर अपनी संतान को खाना देती है।
मैं खुद अपना और अपनी मां का अनुभव साझा करना चाहूंगा। मेरा बचपन केराकत तहसील के मटियारी गांव मेरे ननिहाल में हुआ। मेरे नाना एक प्रतिष्ठित ब्यक्ति थे। क्योंकि वो एक अध्यापक थे।

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