पवार परिवार बीजेपी को डूबा दिया. अजित पवार ने महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया और भाजपा को शर्म से डूब मरना चाहिए. 80 वर्षीय जवान शरद पवार ने पूरा खेल हीं बदल कर रख दिया. चाणक्य तो पवार साहब हीं हैं कोई शाह-वाह नही. पवार साहब के अलावा एक नाम और चाणक्य के रूप में उभरा है जिसका नाम है संजय राउत. बीजेपी महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए इतनी उतावली थी कि उसे नैतिकता और अपनी पार्टी के सबसे बड़े नेता की छवि को मिट्टी में मिला दिया. अजित पवार ने बीजेपी के सपने को मात्र 78 घंटे में हीं चकनाचूर कर दिया. बीजेपी कैसे चूक गयी ? संघ/बीजेपी के रणनीतिकारों से ये ऐतिहासिक चूक कैसे हो गयी ? संघ/बीजेपी ने महाराष्ट्र को बदनाम करने की कोशिश की थी. जिसे वहां की सम्मानित जनता कभी स्वीकार नहीं करती. जो भी हो संघ/भाजपा छवि को महाराष्ट्रऔर देश में कीचड़ में मिल हीं गयी है. वैसे प्रचारमंत्री जी को कीचड़ काफी पसंद है. वो कीचड़ में कमल खिलाने को बहुत उत्सुक रहते हैं.
आधी रात में प्रचारमंत्री महोदय आपातकाल के समय की स्थिति को लागू करते हुए अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए आधी रात में राष्ट्रपति शासन हटाने की मंजूरी दी, रात में ही राष्ट्रपति महोदय ने प्रधानमंत्री के विचार को अपने हस्ताक्षर से वैध कर दिया और 5.18 भोर में गृह मंत्रालय ने गजट जारी कर दिया. उसके बाद तोता रूपी राज्यपाल महोदय ने आनन-फानन में 22 नवंबर को फडणवीस और एनसीपी के बागी अजित पवार को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिला दिया और उसका परिणाम आज 26 को दोपहर बाद सारा देश देख रहा है. इस मामले में बीजेपी की प्रतिष्ठा तो धूमिल होगी हीं परन्तु इस मामले में प्रधानमंत्री महोदय खुद को मुख्य भूमिका में लेकर आये थे. क्यों अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए प्रधानमंत्री ने बिना कैबिनेट के संतुस्ती पर राष्ट्रपति शासन हटाने की मंजूरी दी थी और भोर के 5.18 पर गृह मंत्रालय ने सरकारी गजट निकाल दिया. ये सब आनन-फानन में हुआ.
बीजेपी को हाल के दिनों में चार बहुत बड़े झटके लगे हैं. जिसकी शुरुआत उत्तराखंड और अरुणांचल प्रदेश अदालत में मोदी सरकार को मुँह की खानी पड़ी. उसके बाद अपने जिद की वजह से कर्नाटक में येदुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का शपथ दिलवा दिया और बहुमत साबित करने से पहले से हीं एक भगोड़े/कायर की भाँति सभा छोड़कर भाग गए. उसके बाद 24 अक्टूबर को भाजपा-सेना के पक्ष में आये परिणाम के बाद कुछ मतभेदों की वजह से साथ छूटने के बाद आनन-फानन में 23 की सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ फडणवीस को दिलवा दी और आज पूरी संभावना है कि फडणवीस भी एक रणछोर की भाँति सभा छोड़कर भाग जाएंगे. ये तो पहले दिन से तय था कि एक हारा हुआ योद्धा कभी नहीं जीत सकता.
यहाँ सबसे बड़ा फायदा अजित पवार को हुआ है. पहला फायदा तो ये हुआ कि उन्हें सिंचाईं घोटाले जैसे संगीन मामले में क्लीन चिट मिली है. क्योंकि सिंचाईं घोटाले को चुनावी मुद्दा खुद फडणवीस ने बनाया था और हर सभा में पवार को आर्थर जेल में बंद करने को कहते थे. फडणवीस और विनोद तावड़े ने सिंचाईं मुद्दे को बहुत बड़ा विषय बना दिया था. फडणवीस तो खुद मशहूर फिल्म शोले का मशहूर डायलॉग "चक्की पीसिंग, चक्की पीसिंग, चक्की पीसिंग" हर सभा में बोलते थे, पर 22 नवंबर को हुआ उससे ठीक उल्टा, उलटे अजीत पवार के समर्थन से मुख्यमंत्री बने और उन्हें उप- मुख्यमंत्री बना दिया और अजित पवार को सिंचाईं घोटाले से बरी भी हो गए. इसे कहते हैं चालाकी. अब अजीत बीजेपी के लिए 'पवित्र' हो चुके हैं, क्योंकि क्लीन चिट तो भाजपा की देशभक्त सरकार ने हीं दिया है.
यहाँ सबसे बड़ा फायदा अजित पवार को हुआ है. पहला फायदा तो ये हुआ कि उन्हें सिंचाईं घोटाले जैसे संगीन मामले में क्लीन चिट मिली है. क्योंकि सिंचाईं घोटाले को चुनावी मुद्दा खुद फडणवीस ने बनाया था और हर सभा में पवार को आर्थर जेल में बंद करने को कहते थे. फडणवीस और विनोद तावड़े ने सिंचाईं मुद्दे को बहुत बड़ा विषय बना दिया था. फडणवीस तो खुद मशहूर फिल्म शोले का मशहूर डायलॉग "चक्की पीसिंग, चक्की पीसिंग, चक्की पीसिंग" हर सभा में बोलते थे, पर 22 नवंबर को हुआ उससे ठीक उल्टा, उलटे अजीत पवार के समर्थन से मुख्यमंत्री बने और उन्हें उप- मुख्यमंत्री बना दिया और अजित पवार को सिंचाईं घोटाले से बरी भी हो गए. इसे कहते हैं चालाकी. अब अजीत बीजेपी के लिए 'पवित्र' हो चुके हैं, क्योंकि क्लीन चिट तो भाजपा की देशभक्त सरकार ने हीं दिया है.
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