अयोध्या केस की हर खबर जानने के लिए देश के लोग हमेशा हीं बहुत उत्सुक रहे हैं. परन्तु जब से अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई शुरू हुई है तब से कुछ न कुछ नई बात निकलकर सामने आ रही है. माननीय अदालत हिन्दू पक्ष के वकीलों से तर्क के आधार पर बाते पूछ रहें हैं और उनका प्रमाण भी मांग रहा है और कोर्ट के सवालों का जबाब संबंधित पक्ष के वकील भी देने की कोशिश कर रहें हैं. परन्तु अदालत उनकी सोच से भी आगे जा कर पश्न पूछ रहा है जिसका जबाब देने में कुछ समस्या तो जरूर पेश आ रही है. जैसे कि माननीय अदालत ने तो हिन्दू पक्ष की दलीलों पर यह कहते हुए पश्न उठाया कि मंदिर का नजरिया आपका अपना नजरिया हो सकता है, परन्तु हर किसी का नहीं। आज भी जब सुबह में अयोध्या कैसे जब हिन्दू पक्ष के वकील श्री वैद्यनाथ ने स्कन्द पुराण का जिक्र किया और उसमें राम जन्म भूमि को सरयू के नजदीक के क्षेत्र को चिन्हित करने की कोशिश की तब सुप्रीम कोर्ट के जज श्री चंद्रचूण जी ने कहा कि आप जिस शब्दों का जिक्र कर रहें हैं उसमेँ भगवान कहाँ है ? उसमें तो भगवान के दर्शन का जिक्र है. भाई जब अयोध्या मामले में हिन्दू पक्ष के वकील साहब ये मान ही लिए हैं कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये मस्जिद बाबर ने ही बनवाई थी. तो खामखा बाबर का लाखों बार जिक्र तुम करते क्यों हों ? आज माननीय अदालत ने ये भी पूछ लिया कि मंदिर तोड़ने का आदेश बाबर या उसके सेनापति ने दिया था. इसका आपके पास क्या प्रमाण है ? इसका जबाब संबंधित पक्ष के वकील महोदय नहीं दे सकें. यह सुनवाई अब और ज्यादा देर तक नहीं चलने वाली है. ऐसा माननीय जजों की सक्रियता को देखने से प्रतीत होने लगा है.
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