Saturday, July 13, 2019

संघ का आजादी में योगदान एक मजाक

जैसा कि सुनने में आ रहा है कि अब महाराष्ट्र के नागपुर विश्वविद्यालय में संघ की आजादी के आन्दोलन में भूमिका के बारे में पढ़ाया जायेगा. जो पूर्णतया झूठ पर आधारित होगा. क्योंकि जब इतिहास के पन्नों से संघ के गद्दारी का तथ्य आयेगा तो सारे संघी उसे कैसे जायज ठहरायेंगे ? ये भविष्य में देखना रोचक होगा. आजादी में संघ के इतिहास को पढ़कर जब आज के छात्र उसके आन्दोलन से पिछे हटने का स्पष्टीकरण मांगेंगे तो संघी विचार के लोग शर्म से पानी-पानी हो जायेंगे. देश में ऐसे हजारों तथ्य है जो संघ और इसके संबंधित संगठनों की भूमिका पर स्पष्ट नजरिया रखतें हैं. अपने इस लेख के दौरान मैं कुछ अकाट्य और ऐतिहासिक तथ्यों को सूबूत के तौर पर आप के सामने रखूंगा. उसमें असहयोग आंदोलन,गांधी जी के दांडी मार्च, भारत छोड़ो आन्दोलन जैसे प्रमुख घटनाक्रम शामिल होंगे. जब एक तरफ कश्मीर से कन्याकुमारी तक और दिल्ली से लेकर लाहौर तक करोड़ों आजादी के परवाने अंग्रेजों हूकूमत के हर अत्याचार से लड़ते हुए स्वाधीनता आंदोलन को ऊंचाई पर ले कर जा रहे थे तब संघ के सबसे बड़े नेता सावरकर अंग्रेजों की गुलामी की कसमें खा रहे थे और जेल से माफी मांगती हुई चिट्ठियां लिख रहे थे.

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