Tuesday, June 25, 2019

औरंगाबाद महाराष्ट्र में बच्चे 14 किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर

कितना दुखद है कि एक तरफ जहां प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी वाह वाही करने में ब्यस्त हैं वहीं दूसरी तरफ बीजेपी/संघ शासित महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित एक गांव के बच्चे घर से 14 किलोमीटर दूर पीने का पानी लाने के लिए जाते हैं और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री फड़नवीस जी 25 जून 1975 को आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को पेंशन बांटने में ब्यस्त हैं परन्तु मिलों दूर से पानी लाने वाले बच्चों का दर्द उनकी आंखों ने नहीं देखा। एक राज्य के लोगों के लिए ये शर्म की बात है कि उसका मुखिया आंख होते हुए भी बिना आंख वालों के समान है। जब India Today ने आज उस जगह की रिपोर्ट की तो हमें उन गांव वालों की तकलीफों का पता चला कि पानी की समस्या उनकी जिंदगी में किस हद तक जहर घोल रही है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चे स्कूल से वापस लौट कर अपने घर आते हैं फिर वहां से वो ट्रेन के मार्फत बच्चे जातें हैं और वहां से रेलवे स्टेशन पर पानी भरते हैं और आते हैं रास्ते में सफर के बीच रेलवे पुलिस के लोग क्रूरतापूर्ण उनका पानी गिरा देते हैं जिसकी वजह से बच्चे ट्रेन के डिब्बे में बने ट्वायलेट वाटर टैंक से पानी भरने को मजबूर हो जाते हैं। तो मेरी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री फड़नवीस जी से कर बद्ध निवेदन है कि वो औरंगाबाद के प्यासे लोगों का प्रयास बुझाने पर जोर दें, पेंशन तो दो महीने बाद भी दें सकते हैं। 

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