आज महज कुछ घंटों के बाद लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के प्रचार का पटाक्षेप हो जायेगा। सभी पार्टियां अपने-अपने दावे और आंकड़ों के आधार पर 23 मई दोपहर तक अपनी-अपनी सरकार बनाएंगी उसके बाद चुनाव आयोग आधिकारिक तौर पर एक अंतिम आंकड़ा दे देगा फिर सारी बकवास खत्म हो जायेगी और किसी एक पक्ष या तीसरे पक्ष की सरकार की उम्मीद हो जायेगी। जहां तक मेरा आंकलन है तो स्प्ष्ट तौर पर न तो किसी पार्टी और न हीं किसी गठबंधन को बहुमत मिलने जा रहा है. इस स्तिथि में उन दलों की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो जायेगी जो न तो इस खेमें में शामिल हैं और न हीं उस खेमें में. जैसे बीजद, टीआरएस, वाई एस आर कांग्रेस, टीएमसी जैसी मुख्य एवं शक्तिशाली क्षेत्रीय पार्टियों का रूख आगामी सत्ता के लिए अहम होगा।
यह चुनाव मेरे ख्याल से इतिहास का अब तक का सबसे गंदा चुनाव रहा होगा जिसमें सारी मर्यादाएं चूर-चूर हो गयी, न बात की कोई मर्यादा बची और न हीं भाषा की. यह चुनाव विकास के नाम से शुरू हुआ और भारत-पाकिस्तान, देशभक्त-देशद्रोही, हेमंत करकरे मेरे श्राप से मरा, करकरे देशद्रोही था, कांग्रेस की विधवा, भ्र्ष्टाचारी नंबर वन के रूप में जीवन समाप्ति, बंगाल हिंसा, चुनाव आयोग की दोहरी भूमिका, बुआ-बबुआ के जुमले से होते हुए कल "गोडसे देशभक्त" तक आ पहुंचा है. हम और क्या उम्मीद कर सकते हैं अपने इन मंदबुद्धि आतंक छाप नेताओं से. कल बम ब्लास्ट की आरोपी और मध्य प्रदेश के भोपाल लोकसभा क्षेत्र से राष्ट्रभक्त पार्टी बीजेपी के उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने खुलेआम टीवी मीडिया के माध्यम से कहा कि " नाथू राम गोडसे कल भी देशभक्त था और आज भी तथा कल भी देशभक्त रहेगा". जैसे हीं बीजेपी के नेताओं को इस बात की भनक लगी तो आनन-फानन में उन्होंने एक पत्रकार वार्ता बुलाई और उनके बयान की निंदा करते हुए जनता से सार्वजनिक माफी की मांग की क्योंकि बीजेपी को आदेश हो चुका था कि इनका हेमंत करकरे के संबंध में दिया गया एक बयान बीजेपी को कितना भारी पड़ चुका है और अब तो बात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है और अभी 54 सीटों पर चुनाव होना बाकी है तो तुरंत डैमेज कंट्रोल की कहानी शुरू हो गयी और बहजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री जी दोनों ने उनके इन बयानों की निंदा की. निंदा इसलिए कि प्रज्ञा और हेगड़े ने गाँधी जी को अपशब्द कहा बल्कि निंदा इस लिए की कि 2 दिन बाद अंतिम चरण का वोट पड़ने वाला है और उसमें इनको भयंकर हानि होती अन्यथा अंदर से तो इनकी हीं भाषा वो बोली हैं। जो बीजेपी के लिए अब उलटा पड़ रहा है. कल रात का सूरज ढला और आज सूरज निकला इतने में बीजेपी के दो नेता जिसमें एक कर्नाटक से मंत्री है जिनका नाम अनंत कुमार हेगड़े हैं वो तो प्रज्ञा से दो कदम आगे निकलते हुए बोले कि माफी की कोई जरूरत नहीं है और जो बात 7 दशक से नहीं हुई उस पर अब सार्वजनिक तौर पर बहस होनी चाहिए और उन्होंने कहा कि गोडसे की देशभक्ति पर चर्चा अब नहीं होगी तो कब होगी। वैसे आप सबकी जानकारी की लिए बता दूँ कि हेगड़े संघ के बड़े वफादार कार्यकर्ता है. बीजेपी/संघ की शाखा में मेरे गांव से भी कुछ बच्चे-बूढ़े जाते हैं और उनकी बात सुनकर शायद आप हतप्रभ हो जाएंगे वो भी वही बात बोलते हैं जो अनंत हेगड़े या प्रज्ञा ठाकुर बोल रही है. मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूँ कि संघ अपनी शाखा में गाँधी, नेहरू के प्रति केवल दुष्प्रचार करना सिखाता है. प्रज्ञा और हेगड़े की बयान को मैं मजाक में नहीं टाल सकता क्योंकि मैं इन शब्दों के इनके विमर्श के रूप में देखने की कोशिश कर रहा हूँ. गोडसे गांधी जी का हत्यारा हीं नहीं बल्कि एक आंदोलन का हत्यारा भी था और रही बात इन चतुर्थ श्रेणी के नेताओं की बात तो उनको समझ लेना चाहिए कि गाँधी कोई ब्यक्ति नहीं थे, कोई शरीर नहीं थे जो स्वर्गवासी हो गए तो खत्म हो गए. गांधी एक विचार है वो तब तक ज़िंदा रहेंगे जब तक सबकी सांस चलती रहेगी।
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