आज 2019 के पहले चरण के वोटिंग से ठीक एक दिन पहले सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राफेल पुनर्विचार याचिका के संबंध में बहुत बड़ा झटका लगा. जैसा की विदित है कि पूर्व में राफेल पर जांच के लिए अरुण शौरी, प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा जी जैसे नामी लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी जिसमें सरकार से माननीय कोर्ट ने बंद लिफाफे में राफेल सौदे से संबंधित दस्तावेज अदालत में जमा करनाने का आदेश दिया था और पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार को साफ़-पाक बताया था और अपना फैसला सुनाया था. लेकिन जैसे ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति जनता के सामने आयी तो उसमें प्रतीत हुआ कि सरकार ने कोर्ट से कुछ बात छुपाई है जिसकी बहुत बार चर्चा हो चुकी है. इसी दरम्यान "द हिन्दू" ने अपने स्वतंत्र स्रोतों के माध्यम से एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें मुख्यतः यह बात थी कि वर्तमान सौदे को लेकर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी खुश नहीं थे क्योंकि रक्षा अधिकारियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय भी इसी सौदे को लेकर फ़्रांस की सरकार के साथ बात कर रही थी. जिसे लेकर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी नाखुश थे और उस वक्त के रक्षामंत्री स्वर्गीय श्री मनोहर पारिकर को खत भी लिखा था. बहरहाल हम इससे आगे बढ़ते हैं इस रिपोर्ट को छपते हीं मानों देश की राजनीति में एक भूचाल आ गया फिर जिन लोगों की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था वो इन्हीं अखबार के खुलासों को आधार बनाकर उन्हीं न्यायाधीश के आगे अपनी पुर्नविचार याचिका दाखिल की और सरकार को सफाई पेश करने के लिए अदलात ने आदेश दिया और यहां सबसे कमाल की बात ये हुई कि अटार्नी जनरल के वेणुगोपाल जी ने मान कि ये दस्तावेज रक्षमंत्रालय के हीं है पर चोरी हुए हैं. ऐसा कह कर उन्होंने देश के सामने अपना और सरकार का बहुत मजाक बनवाया, फिर एक दिन बाद बोलते हैं कि ये दस्तावेज चोरी नहीं हुए बल्कि फोटोकॉपी हुए है जो अखबार ने गैरकानूनी तरिके से इसे हासिल किया है और इसके लिए अखबार के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए. यही दलील सुनकर अदालत ने 10 अप्रैल 2019 वक्त फैसले के लिए सुरक्षित रख दिया और आज जब 10 बजे ये फैसला आया तो सरकार के लिए सबसे बड़ा झटका यह था कि सुप्रीम कोर्ट राफेल याचिका पर फिर से सुनवाई के लिए तैयार हो गया. शायद सरकार को इस झटके की उम्मीद पहले से हीं थी जभी कभी चोरी होने का बहाना बनाया तो कभी फोटोकॉपी का. पर अब सरकार इस चुनावी मौसम में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर थोड़ा घिरती हुई नजर आ रही है क्योनी अब ये चोरी हुए दस्तावेज सुबूत का काम करेंगी। इस फैसले के तुरंत बाद से विपक्ष की सारी पार्टियां सरकार पर पूरी तरह से आक्रामक हो चुकी है. चुनावी मौसम में विपक्ष खासकर कांग्रेस के हाथ एक बड़ा और मजबूत मुद्दा लग चुका है जिसको भुनाने की कांग्रेस भरपूर कोशिश करेगी। इस फैसले का राहुल गांधी के ब्यक्तित्व पर भी बहुत बड़ा असर ये होगा कि जो लोग राहुल गाँधी की बात को मजाक में टाल देते थे अब आगे से उनको ऐसा करने से पहले सोचना होगा. मेरे अनुमान के मुताबिक बीजेपी/संघ को इसका कुछ न कुछ तो नुकसान जरूर उठाना पड़ेगा.
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