हमने सरकार को चुना था जन सरोकार के लिए न कि हमारी अपनी विरासत को नष्ट करने के लिए. आप महान प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, संतरी बनने के चक्कर में हमारी काशी की विराट मनमोहक छवि को क्यों तहस-नहस करना चाह रहे हो. मेरे ख़याल से सत्ता में बैठे लोग इतने अज्ञानी भी नहीं (उनमें एक योगी भी हैं जो इस सूबे के मुख्यमंत्री) हैं कि जिन्हें काशी के खण्ड-खण्ड में रची-बसी हजारों लाखों साल की गाथा और उसकी पहचान से वाकिफ न हो. कल NDTV पर रात ९ बजे रविश कुमार का शो देख रहा था तो उसमें वहां के निवासियों की ब्यथा देख दिल भर आया. कुछ तो महिलायें, पुरुष ऐसे थे जो रो रहे थे और उनका कहना था कि ये घर मकान और मंदिर मेरे दादा परदादा की निशानी थी. हमारी ६ या उससे ज्यादा पुस्ते इसी मकान में रह रही थी और हर मकान में एक मंदिर था, जिसे पकड़ कर कई लोग रट बिलखते नजर आ रहे थे. उनक का कहना था कि हमारी काशी की पहचान तो सिर्फ बाबा विश्वनाथ, मणिकर्णिका घाट, दशाश्वमेध घाट, हरिश्चंद्र घाट, अस्सी घाट तथा यहां की सकरी गलियों से थी. जब हमारी यहीं पहचान हमसे छीन ली जायेगी तो काशी और बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता में क्या अंतर् होगा. सरकार की इस पहल से तो हमारा अस्तित्व हीं खत्म हो जाएगा. सरकार का ये कार्य बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम हमारी आस्था के साथ मजाक है. जो हम भक्तों के लिए असहनीय है. ये दर्द स्थानीय निवासियों और बाबा के भक्तो के हैं अब विकास के आगे इनके सनातनी आस्था को कौन समझेगा.
विकास के नाम पर हमारे काशी को क्यों बर्बाद किया जा रहा है. काशी में जितने छोटे-बड़े मन्दिर है सब पुरातन संस्कृति का हिस्सा और अमिट विरासत हैं. तो उन विरासत के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है ? मेरी समझ के अनुसार सरकार का यह कृत्य हमारी संस्कृति और आस्था के साथ खिलवाड़ करने जैसा है.
मेरा भी काशी में बहुत ज्यादा वक्त बीता है. तो मेरे अनुभव के अनुसार काशी की खूबसूरती की धूरि बाबा विश्वनाथ हैं और उनके आस-पास के क्षेत्र जैसे मणिकर्णिका घाट, कचौरी गली, हरिश्चंद्र घाट, अस्सी घाट, संत रविदास मंदिर, राम नगर का किला, बाबा अवधूत की कुटिया, बाबा काल भैरव, दुर्गाकुंड, राम चरित मानस मंदिर, श्री संकट मोचन मंदिर, बी एच यू के अलावा हर वो छोटी-बड़ी गलियाँ और मंदिर हैं जो इस काशी परिक्षेत्र की परिधि में आते हैं. हजारों साल से काशी के बारे में ये कहावत प्रचलित हैं कि वो अविनाशी (जिसका कभी विनाश नहीं हुआ हो) रही है. काशी के घाटों पर प्राचीन भवनों में जो छोटे-छोटे मंदिर पाए जाते हैं. उनके बारे में ये कहानी है कि वे सभी मंदिर ग्रह और नक्षत्र के अनुसार बाबा भोलेनाथ ने खुद बसाये है. दुःख के खबर ये है कि मंदिर क्षेत्र के विकास के नाम उन भवनों और मंदिरों को तोड़ा जा रहा है जिनमें ये अति प्राचीन मूर्तिया १२ सौ साल या उससे ज्यादा वक्त पहले स्थापित की गयी थी. इस तरह का विकास चाहने वाले लोगों कों मार्बल, संगमरमर जैसी सुंदरता तो मिल जायेगी पर पहले जैसी आस्था कहाँ से लाएंगे. वो आस्था कि कहीं और किसी भी गली में एक छोटे ताख पर एक मूर्ती रख कर कोई चला जाता था तो उस मूर्ति पर भी लोग श्रद्धा के साथ जल चढ़ा देते थे. इस सरकारी विकास से तो अब मूर्तियों को स्थापित करने की जगह हीं नहीं मिलेगी.
सरकार के इस कदम से बहुत से बाबा के भक्तों का दिल टूटा है मेरे विचार से इन अति प्राचीन भवनों और मंदिरों को तोड़े बिना भी बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर को बनाया जा सकता था. लेकिन दुर्भाग्य है कि हिन्दू धर्म, हिन्दू आस्था की प्रबल समर्थक पार्टी होने का दावा करने वालों के द्वारा इस तरह का कृत्य किया जा रहा है. जिस तरह मंदिरों को तोड़ने का सिलसिला काशी में चलाया जा रहा है ठीक उसी तरह औरंजेब ने भी किया था पर हमारे पूर्वजों ने औरंगजेब से तो बचा लिया पर मोदी और योगी से नहीं बचा सके.
Great... I respect ur thoughts.. but everyone want some changes.. and no one can denies that modi had done practically well in case of banaras.. some problems are always there.. but what really matters that a person should have a look always with the positive sight so that we can come to know ... how's that person.. and ya we banarasi also don't the intension to just destroy our ancient monuments , ghats and all the things.. which makes banaras cooler than another cities..but the thing is that no one's satisfied.. we all r human.. and not I can say everyone but ya most of us are really not.. if suppose congress will lead us.. surely not going to but just suppose if it is then also we've some different points or may be the same point to discuss.. cause no one's perfect.. nd party's perfect...
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