कल सड़क से लेकर संसद तक सवर्ण आरक्षण बिल को लेकर लोगों की नजरें कौतूहल बस देख रही थी ये तो सबको पता था कि इस बिल का विरोध करने की स्तिथि में कोई भी दल नहीं है अथवा यह बिल लोकसभा से पास होना पक्का है पर इस पर होने वाली बहस पर लोगों की नजरें थी. तो आज मैं अपनी बात कम लिखूंगा और कुछ वक्ताओं की बात को मै रकने की कोशिश करूंगा सन्दर्भ वही होगा शब्द इधर-उधर हो सकते हैं -
लोक सभा के प्रमुख वक्ता -
सरकार की तरफ से आरक्षण पर बात जेटली जी ने रखा और उन्होंने इस बिल के तमाम खूबियों को गिनाया और विपक्ष पर तंज कसने से भी नहीं चुके लेकिन सब मिला-जुलाकर भाषा और शैली शालीन रही.
K H Muniyappa शिवसेना से आरक्षण पर बोलते हुए जीएसटी और नोटबंदी का भी जिक्र करते हुए आरक्षण पर अपनी बात रखी और लाभ लेने के लिए गलत प्रमाण-पत्र का प्रयोग करते है उनको कैसे रोकेंगे ये सरकार तय करे.
कांग्रेस की तरफ से क थामस और दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने बहुत हीं प्रभावी तरिके से अपनी बात रखी और इस बिल को चुराने का भी आरोप लगते हुए कहा कि हमारी हरियाणा की सरकार ने २०१३ में हीं इस बिल को पारित किया था जो कोर्ट से भी अपने मूल रूप में बहाल होकर निकला उसी की कॉपी आपने पिछले साल गुजरात में की और आज फिर संसद में कर रहें है.
असद्दुद्दीन ओवैशी ने अपनी पार्टी की तरफ से वबहुत शानदार पक्ष रखते हुए इस बिल का विरोध किया और कहा कि आप किस आयोग की सिफारिश पर ये बिल लेकर आएं है उस आयोग की रिपोर्ट को संसद पटल पर रखें क्या दलितों जितना दुःख-दर्द सवर्णों ने झेला है उनके घरों को दलितों द्वारा नुक्सान किया गया है अगर नहीं तो आप कैसे आरक्षण की ब्यवस्था क्र सकते हो.
राज्य सभा के प्रमुख वक्ता -
आनंद शर्मा ने कहा कि संविधान संशोधन से गरीब का पेट नहीं भरेगा, उसको न्याय नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि किसान के लिए, नौजवान के लिए जो वादे किए थे, उनका क्या हाल हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को जल्दी दिखानी थी तो महिला आरक्षण बिल पर दिखाते, क्यों सरकार चार साल बाद भी यह बिल लेकर नहीं आई. राजनीति के लिए आप तीन तलाक बिल लाए लेकिन बाकी महिलाओं को न्याय कब मिलेगा. उन्होंने कहा जनता एक बार वादों में बहक जाती है लेकिन बाद में हिसाब जरूर मांगती है लेकिन अब तो आपका हिसाब देने का वक्त है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बिल की पक्षधर है क्योंकि हमने सामाजिक न्याय और खासकर अगड़ी जातियों के लिए न्याय की आवाज उठाई थी. हम इस बिल का समर्थन करते हैं. (Copy)
सपा सांसद प्रोफेसर राम गोपाल यादव अच्छा सवाल उठा रहे आंकड़ों के साथ सरकार को घेर रहें है और कह रहे हैं कि सचिव से लेकर उपसचिव और क्लास अ क्लास बी क्लास स के श्रेणी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाती का कोटा भी पूरा नहीं हुआ है और ऊपर की दो श्रेणियों में पिछड़ा वर्ग जो सर्वाधिक संख्या में हैं वो तो शून्य हैं अनुसूचित जाति का उचित प्रतिनिधित्व श्रेणी ग में जरूर पूरी है उसके बाद सब अधूरा।
पिछड़ा वर्ग के लोगों को ५४ % आरक्षण की ब्यवस्था सरकार करें और अनुसूचित जाति और जन जाति के लोगों की आबादी ३५ % है तो उन्हें उतना आरक्षण मिलना चाहिए ये इस लिए कह रहा हूँ कि जब आप ५० % को पार कर चुके हैं तो इसे भी कर हीं दें. रामगोपाल जी ने उड़ीसा का जिक्र भी किया कि उड़ीसा में ४० % अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग है और मात्र ६ % सवर्ण हैं और सवर्णों को ५० % आरक्षण मिल रहा है और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को मात्र २२.५ % तो आपके माध्यम से मैं कानून मंत्री से आग्रह करूंगा कि वो उड़ीसा के लोगों के साथ न्याय करें और उनकी हिस्सेदारी की अनुरूप उन्हें आरक्षण दें.
यह ऐतिहासिक बिल संभवतः आज ९ जनवरी २०१९ को राजयसभा से पास होकर एक कानून की शक्ल ले लेगा और जहां तक मेरा अनुमान है इसे न्यायिक समीक्षा से गुजरना पड़ेगा
सीबीआई पर सुप्रीम कोर्ट से दिन की दूसरी बड़ी खबर-
आज हीं सीबीआई पर एक फैसला आया जो सरकार के लिए एक बहुत बड़ा झटका था वो ये था कि सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को केंद्र सरकार ने जबरन छुट्टी पर भेज दिया था जिसे आज ७६ दिन बाद कुछ शर्तों के साथ वर्मा को उनके पद पर पुनः बहाल कर दिया है यह खबर ८ जनवरी को दोपहर से पहले हीं आ गयी थी और इसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई, जस्टिस कौल समेत तीन जजों की बेंच के सामने था जिस पर जस्टिस कौल ने मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में सर्वसम्मति का फैसला सुनाया।
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