बिपिन नंदलाल गिरि
चुनावी बिसात बिछ चुकी है तो जाहिर तौर पर घोषणाओं और वादों का अम्बार लगना स्वाभाविक है. इसी कड़ी में कांग्रेस राहुल गाँधी ने कल छत्तीसगढ़ में किसान आभार रैली की. ये सिलसिला तीन राज्यों की कांग्रेस विजय के बाद हुआ. किसान आभार रैली की शुरुआत राजस्थान से होते हुए छत्तीसगढ़ तक पहुंची है और अगले महीने में ऐसी ही एक और किसान रैली मध्य प्रदेश में प्रस्तावित है. कल छत्तीसगढ़ के दौरे पर किसान रैली में राहुल गाँधी ने एक एक बहुत बड़ा ऐलान किया जो सम्भवतः कांग्रेस का अब तक बेस्ट शॉट कहूँ तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.
राहुल का छत्तीसग़ढ की किसान आभार रैली में बड़ा ऐलान -
राहुल गाँधी का ऐलान उन्हीं के शब्दों में, "हम एक ऐतिहासिक फैसला लेने जा रहे हैं, जो दुनिया की किसी भी सरकार ने नहीं लिया है. 2019 का चुनाव जीतने के बाद देश के हर गरीब को कांग्रेस पार्टी की सरकार न्यूनतम आमदनी गारंटी देगी. हर गरीब व्यक्ति के बैंक खाते में न्यूनतम आमदनी रहेगी." राहुल गाँधी के मुंह से ये बस निकले हुए शब्द हीं नहीं हैं ये कांग्रेस के चुनावी गणित की भावी तस्वीर है जो उन्होंने छत्तीसगढ़ की धरती से खेल दिया है. इसका कितना असर होता है ये तो वक्त हीं बताएगा पर मिस्टर गांधी ने अपनी तरफ से गूगली दाल दी है अब सामने वाले पर निर्भर करता है कि वो इस गूगली से किस तरह निपटता है. राहुल ने इस रैली इस रैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनता को साधने का काम खूब किया और एक निश्चित "न्यूनतम आय की गारंटी" का बहुत लोक-लुभावन वादा भी किया और इस वादे पर यकीन दिलाने के लिए उन्होंने कांग्रेस की पिछली सरकार में लागू की गयी और अत्यंत सफल योजनाओं जैसे मनरेगा, सूचना का अधिकार (आरटीआई), भोजन का अधिकार, पढ़ाई का अधिकार का जिक्र किया. इसके साथ हीं राहुल ने "न्यूनतम आय की गारंटी" के माध्यम से एक निश्चित रकम बैंक खाते में डालने की बात कही. इसके पीछे उनकी सोच यही रही होगी की मतदाताओं को यकीन हो जाएगा कि जब इतना सब किये हैं तो ये भी करेंगे.
छत्तीसगढ़ से राहुल के ऐलान का असर -
छत्तीसगढ़ की धरती से इस अति महत्वाकांक्षी फैसले का ऐलान करने पीछे राहुल गांधी और उनकी पार्टी की ये सोच जरूर रही होगी यहां अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति, आदिवासी और किसानों की सर्वाधिक संख्या है और इनके बीच इस ऐलान को करने से हिंदी भाषी क्षेत्रों के गरीब वोटरों में एक सकारात्मक संदेश पहुंचेगा। एक बात और ध्यान देने वाली है कि कर्जमाफी की बात पहली बार राहुल गांधी ने यहीं छत्तीसगढ़ की भूमि से हीं किया था जिसका उनकी पार्टी को मन वांछित लाभ मिला। तो इसी बात को ध्यान में रखकर राहुल इस योजना की घोषणा करने का मौक़ा नहीं चूके और अब भाजपा बहाना बना रही है. वैसे ये सोच भाजपा की थी पर वो चूक गयी. राहुल गाँधी ने इस ऐलान के अलावा एक रूचिकर बात और कही. राहुल गांधी ने पूरे दमखम से कहा कि "कांग्रेस ने कर्जमाफी, जमीन वापसी का वादा पूरा किया. पैसे की कोई कमी नहीं है. हम दो हिंदुस्तान नहीं चाहते. बीजेपी दो हिंदुस्तान बनाना चाहती है. एक हिंदुस्तान उद्योगपतियों का, जहां सब कुछ मिल सकता है और दूसरा गरीब किसानों का हिंदुस्तान, जहां कुछ नहीं मिलेगा, सिर्फ 'मन की बात' सुनने को मिलेगी." वो समझ गए थे कि किसान कर्जमाफी से हीं किसानों और गरीबों का दिल जीतकर रमन सिंह सरकार की विदाई की है.
राहुल के ऐलान के मायने -
राहुल के ऐलान का सीधा मतलब ये है कि कांग्रेस अब सरकार बनाने के लिए लड़ने जा रही है जिसकी झलक अब तक नदारद थी वो राहुल के दो आश्चर्यचकित कर देने वाले फैसले से प्रतीत होने लगा है. वो चाहे प्रियंका गाँधी को सक्रिय राजनीति में लाना हो या पूर्वांचल का प्रभार देना हो या छत्तीसग़ढ में "न्यूनतम आय की गारंटी" की घोषणा करना। इन सब कारकों का कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और उनके प्रशंसकों में एक नए जोश का संचार करेगा और अधिक कुशाग्रता के साथ वो जमीन पर कार्य करेंगे। अब जनता को भी लगने लगा है कि कांग्रेस जीतने के लिए लड़ रही है.
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