बिपिन नंदलाल गिरि
राजनीति में विचारों की जगह तो कोई बची नहीं परन्तु बिमारी की नाम पर अब गंदी टिप्पणियों ने जोर पकड़ लिया है अभी तक तो राजनेताओं और उनके परिवार वालों को हीं गाली दिया जाता था पर अब तो बीमार इंसान के बिमारी को भी निशाना बनाने जाने लगा है. कल कांग्रेस के राज्य सभा सांसद और वरिष्ठ नेता श्री बी के हरिप्रसाद ने सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह की (स्वाईन फ्लू) बीमारी को लेकर एक अत्यंत शर्मनाक बयान दिया जिसकी जितनी भी निंदा की जाय उतना कम है और मै उनके उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ.
लेकिन ये ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि नेताओं ने अपनी भाषा की मर्यादा तोड़ी है मैं आपको 2000 और उसके आस-पास के सालों में लेकर चलता हूँ, जब कांग्रेस बिखरी थी और शरद पवार, तारिक अनवर, सुषमा स्वराज जैसे बड़े और बुद्धजीवी नेताओं ने सोनिया जी को विदेशी महिला, विदेशी है और छुटभैय्ये नेताओं ने ऐसे-ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिसे मैं उल्लेखित नहीं कर सकता तो आप समझ हीं गए होंगे कि वो शब्द कितने अमर्यादित रहे होंगे, आज की (2019) विदेश मंत्री श्रीमती ने 2004 में तो यहां तक एलान कर दिया था कि अगर सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री बनती है तो वो अपने सिर का बाल मुड़ा (गंजी) लेंगी, ये सब सोनिया जी के प्रति उन नेताओं का दुराग्रह और नफरत भरी सोच का नजरिया था.
वक्त धीरे-धीरे बिता 2004 में अटल जी की हार हुई और कांग्रेस की जीत हुई इसी सन्दर्भ में साल 2007 के चुनावी सभा में गुजरात के दंगों को लेकर मोदी जी तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात पर निशाना साधते हुए उन्हें मौत का सौदागर कहा उसके बाद तो मानों बीजेपी हत्थे से उखड़ गयी और आज के प्रधानमंत्री और उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री ने सोनिया जी हीं नहीं वरन समस्त महिला जाति का अपमान किया और जब उन्होंने सोनिया जी (कांग्रेस अध्यक्ष) को जर्सी गाय और राहुल जी को बछड़ा कहा था इससे बड़ी घिनौनी और महिला विरोधी कोई और टिप्पणी नहीं हो सकती, उसी समय समझ में आ गया था कि राजनीति का अब निम्न स्तर आ चुका है और ये कब रूकेगा कुछ नहीं कह सकते.
कितनी बार प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के लोग श्रीमती सोनिया जी की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर खुले मंच से घिनौनी टिप्पणी की है, उस समय किसी भाजपाई बयान वीरों को मर्याद की याद नहीं आयी. चाहे गिरिराज सिंह हो, चाहे अश्विनी चौबे, संबित पात्रा, शुक्ला, अमित शाह जैसे सैकड़ों घटिया सोच और टिप्पणी करने वाले नेता हैं और इसी श्रेणी में कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर जैसे नेता भी शामिल हैं.
2012 में गुजरात के चुनाव के वक्त तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी को लेकर कहा था कि "वाह क्या गर्लफ्रेंड है, आपने कभी देखी है 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड.
उसी दिन ये समझ में आ गया था कि राजनीति में भाषाई मर्यादा अब अपने रसातल में जा चुकी है. इसका दूसरा फ्लू ये भी है कि नफरत की भाषा का जबाब नफरत की भाषा में देने का चलन अब बहुत तेजी से बढ़ चुका है, जिसे रोकना अब नामुमकिन सा है.
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