आज सुप्रीम कोर्ट ने जैसे हीं अयोध्या से सम्बंधित परिवाद पर ध्यान दिया और तीन मिनट के अंदर हीं माननीय कोर्ट ने जनवरी १९ की तारीख अगली सुनवाई के लिए घोषित किया वैसे हीं करोङों लोगों की उम्मीद टूट गयी और एक तरह से सबकी भावनाएं उबाल मारने लगी और सभी राम-मंदिर के लिए राग अलापने लगे और फिर से वही पुराना राग दोहराया गया "राम-मंदिर तो बनाएंगे लेकिन कानून नहीं बनाएंगे".
गृह मंत्री ने रूप में सरदार पटेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को गया लिखा पत्र-
९ जनवरी १९५० के दिन देश के गृह मंत्री ने रूप में सरदार पटेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को लिखा था. पत्र में साफ़ लिखा है कि " मैं समझता हूँ कि इस मामले दोनों सम्प्रदायों के बीच आपसी समझदारी से हल किया जाना चाहिए . इस तरह के मामलों में शक्ति के प्रयोग का कोई सवाल नहीं पैदा होता... मुझे यकीन है कि इस मामले को इतना गंभीर मामला नहीं बनने देना चाहिए और वर्तमान अनुचित विवादों को शान्ति पूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए ."
गृह मंत्री ने रूप में सरदार पटेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को गया लिखा पत्र-
९ जनवरी १९५० के दिन देश के गृह मंत्री ने रूप में सरदार पटेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को लिखा था. पत्र में साफ़ लिखा है कि " मैं समझता हूँ कि इस मामले दोनों सम्प्रदायों के बीच आपसी समझदारी से हल किया जाना चाहिए . इस तरह के मामलों में शक्ति के प्रयोग का कोई सवाल नहीं पैदा होता... मुझे यकीन है कि इस मामले को इतना गंभीर मामला नहीं बनने देना चाहिए और वर्तमान अनुचित विवादों को शान्ति पूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए ."
आज सच्चे राम भक्तों का दिल जरूर टूटा है इसे कहने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए परन्तु संघ,विहिप और भाजपा के फर्जी हिन्दुओं को तनिक भी शर्म नहीं आ रही होगी क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम इन कुचिष्ट लोगों के लिए मात्र और मात्र एक राजनैतिक हथियार की तरह रहें है,उसके कुछ तथ्य मैं रखना चाहता हूँ,1989 में
बीजेपी के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल विहारी जी ने पालमपुर के अधिवेशन में यह संकल्प लिया था कि हम सत्ता में आये तो राम मंदिर का निर्माण करेंगे उसके बाद 1990 में आडवाणी जी के नेतृत्व में रथयात्रा निकलती है उसके बाद 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ढहा दिया जाता है फिर अगले चुनाव के लिए मंदिर मुद्दे को मैनिफेस्टो के पेज नंबर दो पर रखा जाता है और उसका लोगों ने भरपूर समर्थन भी किया था'
संयोगवश 1998 में कुछ दिनों के लिए भाजपा की सरकार बनी और गिर गयी फिर कुछ महीनों के अंतराल पर चुनाव हुआ और बीजेपी सहयोगियों के सहायता से एक बार फिर से सरकार बनाई और अपना कार्यकाल लगभग पूरा किया और सबसे स्तब्ध करने वाली बात ये रही की भाजपा ने इस दौरान राम मंदिर का कभी भी जिक्र नहीं किया और चुनाव हार गयी फिर इन्होंने ड्रामा फैलाया कि हमारे पास बहुमत नहीं था न राज में बहुमत था न केंद्र में बहुमत था पर एक बार आप हमें दोनों जगह बहुमत दो हम मंदिर बनवा के दिखाएंगे और जनता ने उनकी इन बातों पर यकीन करके इन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 उत्तर प्रदेश में विधान सभा के चुनाव में बहुमत से बहुत ज्यादा मत दिया पर इन्होनें लोगों के विश्वास का मजाक बनाकर रख दिया.
2009 के चुनाव तक जो मंदिर मुद्दा बीजेपी के मैनिफेस्टो में 2 नंबर पर था वो 2014 के लोकसभा चुनाव में 48 वें नंबर पर पहुँच गया,संघ और भाजपा ने शिवाय कोरी राजनीति के और कुछ नहीं हुआ ये बात सत्य है कि राम आस्था के विषय हम सनातन हिन्दुओं के लिए है परन्तु बीजेपी और संघ के लिए राम जी बस वोट के विषय है.
सरकार का साढ़े चार साल का कार्यकाल ख़त्म हो गया और लोकसभा चुनाव में अब मात्र 6 महीने का और वक्त बचा है तब संघ को राम-मंदिर बनाने का ख्याल आता है और सरकार हरकत में आती है अरे मोदी जी आपने जितना समय नेहरू और गाँधी परिवार को गली देने में जाया किया अगर उसका आधा ध्यान मंदिर के मामले पर दिया होता तो आज राम लला टाट में नहीं होते आज उनका भब्य,आलिशान मंदिर बन चूका होता या बनने का रास्ता प्रशस्त हो चुका होता.
आप लोगों ने हिन्दू-हिन्दू कह कर मंदिर-मंदिर रट कर सबको बहुत झसा पर अब नहीं झस पाओगे श्रीमान ये पब्लिक है सब जानती है कि चुनाव के वक्त जब आपको कुछ नहीं दीखता तब आपको हिन्दू और मंदिर दिखता है,हमारे राजा राम को भी तुम लोनों ने ठग लिया,राजाराम तो दिल के निश्छल हैं उन्हें क्या पता था कि रावण से भी बड़े पापी कलयुग में जिन्दा हैं जो मुझे भी ठग लेंगे.
"श्री राम को भी ठग लिया है संघ ने"
गृह मंत्री ने रूप में सरदार पटेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को गया लिखा पत्र-
९ जनवरी १९५० के दिन देश के गृह मंत्री ने रूप में सरदार पटेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को लिखा था. पत्र में साफ़ लिखा है कि " मैं समझता हूँ कि इस मामले दोनों सम्प्रदायों के बीच आपसी समझदारी से हल किया जाना चाहिए . इस तरह के मामलों में शक्ति के प्रयोग का कोई सवाल नहीं पैदा होता... मुझे यकीन है कि इस मामले को इतना गंभीर मामला नहीं बनने देना चाहिए और वर्तमान अनुचित विवादों को शान्ति पूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए ."
आज सच्चे राम भक्तों का दिल जरूर टूटा है इसे कहने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए परन्तु संघ,विहिप और भाजपा के फर्जी हिन्दुओं को तनिक भी शर्म नहीं आ रही होगी क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम इन कुचिष्ट लोगों के लिए मात्र और मात्र एक राजनैतिक हथियार की तरह रहें है,उसके कुछ तथ्य मैं रखना चाहता हूँ,1989 में
बीजेपी के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल विहारी जी ने पालमपुर के अधिवेशन में यह संकल्प लिया था कि हम सत्ता में आये तो राम मंदिर का निर्माण करेंगे उसके बाद 1990 में आडवाणी जी के नेतृत्व में रथयात्रा निकलती है उसके बाद 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को ढहा दिया जाता है फिर अगले चुनाव के लिए मंदिर मुद्दे को मैनिफेस्टो के पेज नंबर दो पर रखा जाता है और उसका लोगों ने भरपूर समर्थन भी किया था'
संयोगवश 1998 में कुछ दिनों के लिए भाजपा की सरकार बनी और गिर गयी फिर कुछ महीनों के अंतराल पर चुनाव हुआ और बीजेपी सहयोगियों के सहायता से एक बार फिर से सरकार बनाई और अपना कार्यकाल लगभग पूरा किया और सबसे स्तब्ध करने वाली बात ये रही की भाजपा ने इस दौरान राम मंदिर का कभी भी जिक्र नहीं किया और चुनाव हार गयी फिर इन्होंने ड्रामा फैलाया कि हमारे पास बहुमत नहीं था न राज में बहुमत था न केंद्र में बहुमत था पर एक बार आप हमें दोनों जगह बहुमत दो हम मंदिर बनवा के दिखाएंगे और जनता ने उनकी इन बातों पर यकीन करके इन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 उत्तर प्रदेश में विधान सभा के चुनाव में बहुमत से बहुत ज्यादा मत दिया पर इन्होनें लोगों के विश्वास का मजाक बनाकर रख दिया.
2009 के चुनाव तक जो मंदिर मुद्दा बीजेपी के मैनिफेस्टो में 2 नंबर पर था वो 2014 के लोकसभा चुनाव में 48 वें नंबर पर पहुँच गया,संघ और भाजपा ने शिवाय कोरी राजनीति के और कुछ नहीं हुआ ये बात सत्य है कि राम आस्था के विषय हम सनातन हिन्दुओं के लिए है परन्तु बीजेपी और संघ के लिए राम जी बस वोट के विषय है.
सरकार का साढ़े चार साल का कार्यकाल ख़त्म हो गया और लोकसभा चुनाव में अब मात्र 6 महीने का और वक्त बचा है तब संघ को राम-मंदिर बनाने का ख्याल आता है और सरकार हरकत में आती है अरे मोदी जी आपने जितना समय नेहरू और गाँधी परिवार को गली देने में जाया किया अगर उसका आधा ध्यान मंदिर के मामले पर दिया होता तो आज राम लला टाट में नहीं होते आज उनका भब्य,आलिशान मंदिर बन चूका होता या बनने का रास्ता प्रशस्त हो चुका होता.
आप लोगों ने हिन्दू-हिन्दू कह कर मंदिर-मंदिर रट कर सबको बहुत झसा पर अब नहीं झस पाओगे श्रीमान ये पब्लिक है सब जानती है कि चुनाव के वक्त जब आपको कुछ नहीं दीखता तब आपको हिन्दू और मंदिर दिखता है,हमारे राजा राम को भी तुम लोनों ने ठग लिया,राजाराम तो दिल के निश्छल हैं उन्हें क्या पता था कि रावण से भी बड़े पापी कलयुग में जिन्दा हैं जो मुझे भी ठग लेंगे.
"श्री राम को भी ठग लिया है संघ ने"
ye glt huaa jldi se jldi faisla hona chahiye dono bne
ReplyDelete