बिपिन नंदलाल गिरि
आज देश में एक ऐसा माहौल बना दिया गया है कि सत्ता और संघ के साथ आपके विचार टकराते हैं तो तुरंत आपको देशद्रोही, गद्दार, मूर्ख, फलाना, फलाना और न जानें क्या-क्या बता दिया जाता है. अभी चंद रोज पुरानी बात है देश के मशहूर फिल्मी कलाकार नसीरुद्दीन शाह ने देश के हकीकत और बेहद सवेदनशील हालत पर एक बात रखी कि "आज हमारे देश में ये हालात है कि एक गाय के जान की कीमत एक (सुबोध कुमार मृत) दरोगा के जान से ज्यादा है और अगर कल मेरे बच्चे को भीड़ घेर ले और वो उनसे पूछे कि तुम हिन्दू हो या मुसलमान तो मेरे बच्चे उस भीड़ को इस बात का क्या जबाव देंगे : नसीरुद्दीन शाह ".
नासिर जी के इस वक्तब्य के बाद देश में बवंडर आ गया मानों ऐसा प्रतीत होने लगा कि नासिर साहब ने देश में कोई बम फोड़ दिया हो और गोडसे से बड़ा हत्यारा हो. मीडिया में बहस का दौर शुरू हो गया और हर बार की भाँति विहिप, हिन्दू सेना, आरएसएस, बीजेपी के तरफ से उन्हें देशद्रोही साबित करने के लिए एक पूरी फ़ौज उतार दी जो जाहिलों की तरह उनके बारे में अनाप-शनाप बकना शुरू कर चुके थे और तो और कुछ लोग तरो पकिस्तान जाने के सलाह देने तक हीं सिमित थे और कुछ तो बाकायदा नासिर साहब की पकिस्तान की एयर टिकट भी बुक करवा दी थी. अब सवाल ये उठता है कि क्या देश में एक विचार रह सकता है मेरा मानना हैं नहीं तो उनके सोच में ये बात क्यों बैठ पा रही है या वो जान-बूझकर नासमझ बनने की नाकाम कोशिश कर रहें है नासिर साहब का मूल सवाल क्या था अभी कुछ हफ्ते पहले उत्तर-प्रदेश के बुलंदशहर में सुबोध सिंह नामक बहादुर दरोगा की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गयी थी और इस घटना में सुमित नामक एक और युवक मारा गया था और मारा किसने था भीड़ ने और किस लिए मारा था गौकशी की बात को लेकर उग्र प्रदर्शन के बहाने तो देश के ताने-बाने पर सवाल तो उठेगा कि क्या एक गाय के लिए किसी इंसान का कत्ल किया जाना जायज हो सकता है. इसके बाद नासिर साहब के बात पर बवाल बढ़ने के बाद उनका एक और बयान आया कि मेरी कई पुश्तें इसी मुल्क में दफन हुई और आगे भी होंगी ये देश मेरा है और मैं अपने देश से प्यार करता हूँ, परन्तु मुझे अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी के सामने चीखने की जरूरत नहीं है.
इस दुःखद घटना के घटित होने के बाद सूबे के मुखिया माननीय योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि गौकशी करने वाले के जांच हम पहले करेंगे और इसी लाइन को राज्य के डीजीपी महोदय ने भी दोहराया था सवाल तो थी खड़े होने लगे थे जब राज्य के दो शीर्ष लोगों के मत घटना के कुछ घंटों के बाद जनता की बीच में आ जाये तो समाज और देश से प्रेम करने वालों को चिंता जरूर होनी चाहिए अगर समाज के लोगों को इन घटनाओं पर चिंता नहीं होगी तो वो देशहित में नहीं होगा ये तो सत्य है। माना कि गाय हम हिन्दूओं की आस्था की प्रतीत है हम उनकी पूजा करते हैं उनको काटना किसी भी तरह से जायज नहीं है परन्तु उनके नाम पर किसी निर्दोष को मार देना ये कहा से जायज है हमारे गीता में, पुराण में, उपनिषद में ऐसे कृत्य को चांडाल का कृत्य कहा गया है ऐसे लोगों को दंड देने का कार्य संविधान का है न कि बीड की रूप में एकत्र हुई जनता की. देश में गाय के नाम पर पहलू खान, सुबोध सिंह जैसे न जाने कितनी हत्याएं हुई है और नतीजा सिफर रहा है तो नासिर साहब को पकिस्तान भेजने वालों तुम देश के भावों को आंसूं करके देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर रहे हों. किसी भी गलत कार्य को गलत साबित करने और उसे दंड देने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ न्यायालय को है उसके अलावा किसी को भी नहीं।
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