आज हमारा देश एक बहुत हीं अजीब और शर्मनाक परिस्तिथि का सामना का कर रहा है. सीबीआई हमारे देश कि सबसे बड़ी जाँच एजेंसी है जिसका रुतबा अब तक विदेशों में भी था परन्तु दो दिन पहले जो रहस्योद्घाटन हुआ उससे हर देशवासी का दिल टूट गया,हुआ ये कि सबसे बड़ी जांच एजेंसी के क्रम संख्या एक और दो के अफसरान के बीच जो तू-तू मै-मै पिछले कुछ महीनों से कमरे के अंदर हो रही थी वो मंगलवार को सबके सामने निकिल कर सतह पर आ गयी और देशवासियों को शर्मिंदा कर गयी.
वर्तमान सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और एक नई जगह विशेष निदेशक बनाकर गुजरात से लाये गए राकेश अस्थाना के बीच हुई. पहले वर्मा जी ने अस्थाना पर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी केस में 2 करोड़ रुपया घुस लगते हुए जांच का आदेश दिया उसके बाद अस्थाना जी ने वर्मा जी के ऊपर 3 करोड़ घुस लेने का आरोप लगाया और सुबूत के नाम पर कुछ कागज पीएमओ और सीवीसी को दिए,इनके लगाए आरोपों पर जांच होती उससे पहले हीं रात दो बजे इन दोनों अधिकारीयों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाता है और रात 2 बजे नागेश्वर जी को नया सीबीआई निदेशक नियुक्त कर दिया जाता है. साहेब को पता नहीं क्या हड़बड़ी थी कि रात में हीं सब कर दिए जब सब सुबह उठ कर देख रहें है तो दंग रह जाते हैं कि रातों-रात इतना बड़ा बदलाव क्यों और कैसे हो गया.
अब हम थोड़ा राकेश अस्थाना के बारे में जान लेते हैं,राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के 1986 के आईपीएस अधिकारी हैं और इन्हें मोदी के आँख का तारा भी कहा जाता है अस्थाना जी मोदी जी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए अनेक वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं और जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है परन्तु हमेशा से इनके ऊपर संदेह किया जाता रहा है. लालू को चारा काण्ड में फ़साने का आरोप भी इन पर लग चूका है इसके बाद 2002 के गोधरा नरसंहार की जाँच करने वाली कमेटी को भी ये अपने निचे संचालित कर चुके थे,जिनमें प्रत्यक्ष रूप से जान-माल का नुकसान दिखाई देने के बाद भी साहेब को आरोपों से बरी किया था उसके बाद मध्य प्रदेश का चर्चित व्यापम घोटाले की जांच कमेटी को भी इन्होने हीं लीड किया और मामा यानी शिवराज सिंह को साफ-सुथरा करार दिया जो कि बहुत दुःख की बात है क्योंकि इस घोटाले से जुड़े लगभग 50 लोगों की या तो हत्या कर दी गयी या उन्होंने खुद हीं आत्महत्या कर लिया।इतनी खूबियों और अहसानों के बाद साहेब जी ने इनको पुरस्कृत करते हुए गुजरात से निकालकर दिल्ली सीबीआई में लेकर आये वो भी बहुत काबिल और वरिष्ठ अधिकारीयों को दरकिनार करते हुए एक नया पद बनाया और इनको सम्मानित किया।
इन सब का परिणाम अब देशवासियों के सामने है जांच एजेंसी की जो शर्मिंदगी हुई वो अलग पर साहेब का भी नींद हराम कर दिया और पोल खुलकर जनता के सामने आ गयी वाकई हमारा देश बदल रहा है 70 सालों के इतिहास में पहली बार देश की सर्वोच्च अदालत के चार वरिष्ठ जज बवहर आकर पत्रकार वार्ता करके अपने दबाव का अहसास कराते है और अब सीबीआई के गठन के 55 साल बाद सीबीआई के हीं दो अफसरानों के बीच की लड़ाई सड़कों पर आ गयी है और सीबीआई खुद सीबीआई पर छापे डाल रही है. अब तो ये समझना पड़ेगा जब दोनों अधिकारी कोर्ट में है तो तो जांच किसकी होगी।
सनद करने वाली बात ये है कि आलोक वर्मा अपने आप को सीबीआई के निदेशक पद से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है और कुछ तकनिकी बातों को सम्मिलित किया है अब इनके सम्बन्ध में सारी राजनितिक पार्टियों की सहानभूति उमड़ने लगी है और तो और प्रशांत भूषण जी ने भी आलोक वर्मा को हटाने की खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है जिस पर आने वाले दो दिनों में माननीय अदालत सुनवाई के लिए ध्यान में लाया जायेगा।
मेरा देश बदल रहा है पर ये बदलाव अलोकतांत्रिक है.
#CBIVCBI ki jung
ReplyDeletekmal ho gya
ReplyDelete