हम ईमानदारी से कहे तो समाज का मूलस्वरूप अब नजर ही नहीं आता ऐसा लगता है कुछ आततायी संगठन धीरे-धीरे समाज के भाई-चारे को दीमक की तरह खाते गए और हम शायद देख कर भी उन्हें अनदेखा करते रहे आज अगर हम भाई-चारे की बात करे तो हमारे ही पड़ोस में हमारे से छोटे बच्चे हमे दूसरे मुल्क का नागरिक बता देते है आखिर उनके मन में ये जहर कौन भर रहा है तो मै यकीन से कह सकता हू की कुछ संगठन है जो उन्हें भड़का रहे है और वो हमारे छोटे भाई उस संगठन की बड़े गर्व के साथ प्रसंशा करते है परन्तु सवाल करने पर आप को दूसरे देश का बता देते है तो ऐसे बच्चो को हमे समाज के भीतर ऐसा माहौल बनाना चाहिए की वो अभी अपने पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दें न की देशभक्त और देशद्रोही बनने और बनाने की ऐसे बच्चो का भविष्य क्या होगा ये सोच के डर लगता है हमारे समाज से सहन-शीलता जैसे अब गायब सी हो गयी है ठीक वैसे ही जैसे हमारे देश से गौरैया पक्षी और गिद्ध।
कुछ दिनों बाद 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस मानाने जा रहे है तो हमे एक पल रुककर यह जरूर सोचना चाहिए की हम कितने स्वतंत्र है क्या हम जो चाहते है वो बोल सकते है,लिख सकते है,जाति,धर्म,संप्रदाय से ऊपर उठकर हम कितनी बात कर सकते है,मै गलत भी हो सकता हूँ परन्तु हमे इन सबके बारे में जरूर सोचना चाहिए क्यों की हमारे आगे हमारी आनी वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है की हम उनके लिए कैसा भारत छोड़कर जाना चाहेंगे जहाँ अगर वो किसी खास विचार के विरुद्ध अपनी बात रखे तो उन्हें दूसरे मुल्क का बताया जाये या किसी खास संगठन से सम्बन्ध न रखे तो उन्हें एक खास समुदाय विरोधी बोला जाय मेरे ख्याल से यह हमारे सभ्य समाज में उचित नहीं है।
हमारे सभ्य समाज हमारे महान भारत में ऐसी बातों की रत्ती भर भी जगह नहीं होनी चाहिए हमें ऐसी आजादी चाहिए कि हम सही को सही और गलत को गलत कह सकें क्योंकि संगठन और सत्ता आते-जाते रहेंगे परन्तु देश हमारा हजारों साल से था और करोड़ों साल तक रहेगा तो कृपा कर के हम अपने भारत को सूर्य की तरह चमकता भारत बनाएं न की दाग-धब्बे वाला भारत। जय हिन्द
किसी भी त्रुटि के क्षमा चाहता हूँ.........
No comments:
Post a Comment