लोकतंत्र का काला दिन आज पूर्ण हुआ. 1975 में इंदिरा सरकार द्वारा घोषित रूप से आपातकाल लागू किया था. तब के तत्कालीन विपक्ष जिसमें स्व. अटल जी , स्व. देसाई जी, जय प्रकाश नारायण जी, लोहिया जी, जैसे लोग सरकारी दमन का नाम देते थे. जिसमें वे लोग "मीसा" क़ानून के तहत जेल गए थे. उसे वो लोग और आज के सत्ताधारी दल के लोग लोकतंत्र को "काला अध्याय" मानते हैं. लेकिन आज जो हो रहा है. वह अघोषित रूप से आपातकाल है. 2019 में कर्नाटक में राहुल गांधी ने एक बयान दिया था. जिसके संदर्भ में कल गुजरात के मजिस्ट्रेट ने दो साल की सजा का फरमान सुनाया और आज आनन-फानन में राहुल गांधी की वायनाड से लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गयी है. शायद ये बीजेपी की घबराहट है.
जिन्होंने ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया उन्हें भी जानना जरूरी है कि वो कौन हैं ? कहां से आए हैं ? कोई स्वयंसेवी संस्था चलाते हैं अथवा किसी राजनैतिक दल से संबंध रखते हैं ? जी हां, तो ज़बाब ये है कि शिकायत कर्ता महोदय का नाम पुर्णेश मोदी है. जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं. ये महाशय उसी प्रदेश के निवासी हैं, जिस प्रदेश से माननीय प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी. अब तो आप समझ हीं गए होंगे कि बात गुजरात प्रदेश की हो रही है.
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जब से राहुल गांधी ने "भारत जोड़ो यात्रा" शुरू की और राहुल को जनता का अपार समर्थन मिला. उससे संघ/सरकार अंदर से डर गयी है. राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म कर देना कांग्रेस के लिए बहुत सुनहरा अवसर होगा. अब राहुल गांधी बिना रुके बोल सकेंगे. राहुल गांधी के पास अब एक साल का पूरा समय है कि जनता के सामने निर्भीक होकर जनसरोकार का मुद्दा उठाएं. शायद जनता अब राहुल गांधी के प्रति एक हमदर्दी रखेगी. क्योंकि राहुल गांधी ने वही कहा है जो हर मानस के अंदर तैर रही है.
राहुल गांधी के निलंबन के बाद या तो कांग्रेस एकजुट हो जायेगी या बिलकुल बिखर जायेगी. यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी का आगे की दिशा क्या होती है ? मेरा ब्यक्तिगत मानना है कि अब राजस्थान में पायलट और गहलोत दोनों एक हो जाएंगे. ऐसे वक्त में राजस्थान में बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल होने वाली है. इसका असर राजस्थान हीं नहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक में होने वाले चुनाव में गहरा असर डालेगा। कांग्रेस इसे अब अडानी घोटाले पर संसद में राहुल के सवाल के बारे में 2024 के चुनाव तक ज़िंदा रखेगी। जिसमें सम्भवतः विपक्ष की पार्टिया भी मामले की गंभीरता को देखते हुए एकजुट होंगी। अगर एकजुट नहीं होंगी तो क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व 2024 के बाद नहीं बचेगा। शिव सेना और लोक जनशक्ति पार्टी इसका वर्तमान उदाहरण है.
राहुल गांधी ने इस सरकार को सबसे मुखर होकर घेरा है. अगर 2014 से विपक्ष की तरफ से कोई सबसे मुखर आवाज निकली है तो वो राहुल गांधी की थी. राहुल गांधी की बात को लोगों ने व्हाट्सएप्प विश्वविद्यालय के माध्यम से सुना, पढ़ा और उसके अनुसार राहुल के बारे में लोगों ने अपनी राय बनाई या झूठ का शिकार हुए. भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी के पक्ष में लोगों ने एक सकारात्मक विचार बनाया था. कांग्रेस की तरफ से अध्यक्ष खरगे, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, के. सी. वेणुगोपाल प्रियंका गांधी, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल समेत सभी नेताओं ने सरकार के खिलाफ राहुल के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है. यही गांधी परिवार की कमाई है. राहुल गांधी का संसद से निलंबन इंदिरा गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने की याद दिला दी.
अब तो माननीय कोर्ट और सरकार को भाषण में शब्दों का एक लिस्ट निकाल देनी चाहिए.अन्यथा विपक्ष को हमेशा के लिए नेश्ता-नाबूत कर दिया जाएगा. एक तरफ सत्ता पक्ष के तमाम नेता किसी समुदाय या किसी ब्यक्ति के खिलाफ बहुत हीं घटिया शब्दों का प्रयोग करते हैं. उन्हें कोई सजा नहीं मिलती. हाल के हीं दिनों में कुछ लोगों को तो (आदर के साथ ) माननीय हाई कोर्ट ने बाईज्जत बरी भी किया. विपक्ष को भी अब सचेत होने की जरूरत है.लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि विपक्ष की आवाज को भी महत्व दिया जाता है. जिसे आज की सरकार ने लगभग खत्म कर दिया है.