Wednesday, November 30, 2022

रवीश कुमार

गोदी मीडिया के इस दौर में जनता की आवाज श्री रवीश कुमार जी ने NDTV से इस्तीफा दे दिया। क्योंकि NDTV को अडानी ने पिछले दरवाजे से खरीद तो लिया लेकिन रवीश की ईमानदारी को खरीदने के लिए अडानी की तिजोरी में पैसा नहीं रहा होगा। 
आज के डूबते हुए सूरज के साथ सच की‌ आवाज रवीश कुमार ने भी अपना इस्तीफा NDTV के मालिक को सौंप दिया। ऐसा उम्मीद हर नागरिक को चैनल बिकने वाली खबर के बाद हीं पता लग गई थी। आज के चरण वंदना के दौर में रवीश कुमार ने अपना मेरू दण्ड सीधा रखते हुए जनता की आवाज बनकर सरकार से सवाल पूछा। शायद यही वो वजह रही कि बीजेपी ने रवीश कुमार के शो "प्राइम टाईम" का घोषित बायकॉट कर रखा था। क्योंकि आज की झूठी सरकार को सिर्फ अपनी वंदन पसंद है। सवाल पूछने वालों को शत्रु की नजर से सत्तारूढ़ पार्टी देखती है।
रवीश कुमार के बारे में बस इतना ही कहा जाए कि किसी गरीब शोषित या मजदूरों की बात आई है वहां पर रवीश कुमार उनके हक में खड़े हुए हैं‌। चाहे लाक डाउन का मौका हो या किसानों का आंदोलन, युवाओं की भर्ती का मामला हो या रेलवे ग्रुप डी की भर्ती का मसला। सबको रवीश कुमार अपनी तरफ से टीवी के माध्यम से बल प्रदान किया। उनकी आवाज बने। इसके लिए उन्होंने एक नौकरी सीरीज का लंबा प्राइम टाइम शो किया। जिसकी वजह से हजारों अभ्यर्थियों को उनका जॉइनिंग लेटर मिला। रवीश कुमार के इस शो को देखकर बड़ी खुशी होती थी कि कोई एक ऐसी आवाज तो है, जो मजबूर लोगों की बातों को सुन रहा है और उनकी बातों को जनता तक पहुंचा रहा है। क्योंकि रवीश कुमार एकतरफा बात नहीं करते। वो हमेशा तथ्यों के साथ अपनी बात को रखते हैं। और यही बात सरकार को नागवार लगती है। सरकार ने एक रवीश कुमार से पीछा छुड़ाने के लिए पूरा एनडीटीवी खरीद लिया। जो प्रणव राय कल तक NDTV के मालिक थे तो आज उसी चैनल के मालिक अडानी जी हो गए। अरे वही अडानी जी जिनकी गिनती साहब के तीन-चार मित्रों में होती है। उन्हीं में से एक अडानी जी आजकल एयरपोर्ट से लेकर खदान सबकुछ अपने नाम से खरीद रहे हैं। रवीश कुमार एकाधिकार के खिलाफ एक लड़ाई लड़ रहे थे। जनता का पैसा किसी एक-दो के पास क्यों जाए? हिंदुस्तान के अंदर हजारों लाखों ऐसे ब्यवसायी हैं जिनकी क्षमता हजारों लोगों के लिए रोजगार मुहैय्या कराने की है। लेकिन उनकी तरफ सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है।