Tuesday, February 18, 2020

पी के का केजरी को दिल्ली जीताने के बाद बिहार प्लान का खुलासा

दिल्ली चुनाव परिणाम के उपरान्त देश का माहौल जामिया यूनिवर्सिटी पर फिर से आकर टिक गया है. दो-तीन दिन से एक-एक करके व्हाट्सप्प वीडियो रिलीज किये जा रहें हैं. जिनकी सत्यता पर संदेह बरकरार है. परन्तु देशभक्त न्यूज़ चैनल अपनी भक्ति का भरपूर निर्वहन करते हुए बेरोक-टोक उसे चला रहें है और तरह-तरह की भाषा का प्रयोग कर रहें हैं. अब तो हर कोई दिल्ली के परिणाम से वाकिफ हो चुका है. केजरीवाल जी ने अपनी फिर से पुरानी वाली मंत्री परिषद को बहाल किया है. आधा दर्जन से ज्यादा महिला विधायक जीत कर आने के बाद भी उनमें से किसी एक को मंत्री लायक नहीं समझ सकें. वैसे ये आंकलन केजरी और उनकी टीम के लोगों को करना होगा. फिर भी मैं कहना चाहूंगा कि इतने बड़े बहुमत से दुबारा जीत कर आने के बाद कम से एक महिला मंत्री को जरूर शामिल किया जाना चाहिए था. 
दिल्ली में केजरीवाल को सफलता दिलाने के और नितीश की पार्टी से निकाले जाने के बाद प्रशांत किशोर आज बिहार पहुंचे और वहाँ बिहार को एक नया आयाम देने के हुंकार भरी. क्योंकि इस बरस के अंत में अब अगला चुनाव बिहार में हीं होना है. तो उन्होंने सोचा कि क्यों न अभी से बिहार पर चढ़ाई कर दी जाय. आने वाले 10 सालों में बिहार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने जो शब्द प्रयोग किये वो सुनने में बहुत रोचक हैं. जिनमें प्रशांत किशोर का कहना है कि हम किसी को हराने या किसी को जिताने नहीं आये हैं. बल्कि प्रदेश के होनहार, ईमानदार एवं कर्मठ युवाओं को बस बिहार के खातिर जगाने आएं हैं. जिसके लिए उन्होंने 20 फरवरी से "बिहार की बात" नाम से एक कार्यक्रम चलाने का औपचारिक ऐलान भी कर दिया है. अब देखना ये है कि पी के का बिहार में आना भाजपा-जदयू गठबंधन को कितना नुकसान पहुंचा पाता है या नितीश कुमार, मोदी और शाह की जोड़ी के साथ मिलकर पी के को शून्य साबित करती है. क्योंकि नितीश अपने भरोसेमंद चेहरे के रूप में चुनाव में उतरेंगे तो मोदी-शाह अपने भारी भरकम कद के साथ. जिसमें ढेर सारा धन होगा, सत्ता की ताकत होगी, मंत्रियों की फ़ौज होगी. उसमें हिन्दू-मुस्लिम करने वाले कुछ बयानवीर होंगे, कुछ गोली मारो...... को बोलने वाले होंगे. इन सबसे बिहार की प्यारी जनता और पी के को लड़ना होगा. अब पी के इनका कैसे मुकाबला करते हैं ? ये आने वाले दिनों में देखने को मिल जाएगा. बिहार में आने वाले चुनावों की शोर अभी से सुनाई देने लगी हैं. शायद पी के को ये पता है कि मुख्य वोटर किसे वोट करना है वो 6 महीने पहले हीं अपने मन में निर्णय कर चुका होता है. इसलिए वो अभी से बिहार की जनता के मन में जगह बनाने की कोशिश कर रहें हैं.  

1 comment:

  1. Bhai hme Hindi smjh aati h or koi bhasha nhi. is bhasha se to hmaaraa door-door tk sarokaar nhi rha hai.

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