Saturday, December 8, 2018

पांच चरणों के चुनाव समाप्ति के बाद एग्जिट पोल गोदी मीडिया का नया मसाला

देश के पाँच राज्यों में होने वले चुनाव का कल शाम को पटाक्षेप हो चुका है और जनता ने बड़बोले नेताओं की किस्मत को ईवीएम मशीन में कैद कर दिया है और अब 11 दिसंबर को आने वाले परिणाम का इन्तजार बड़े हीं धैर्यपूर्वक तरिके से कर रही है और ईधर देश में एक जगह सबसे ज्यादा हलचल हो रही है वो है गोदी मीडिया का कार्यालय उन्हें जनता के जनादेश के बहाने एग्जिट पोल के नाम पर चार दिन तक शो चलाने के लिए पर्याप्त मसाला मिल गया है और अब इसी में उलझे पड़े है कि मेरा पोल सही है या उसका पोल सही है इस बीच कुछ चैनल तो बाकायदा मुख्यमंत्री तक की खोज में जुट गयी है कि किस पार्टी का कौन सा मुख्यमंत्री होगा और कौन सा मंत्री और हद तो तब हो गयी जब बड़े बड़े पत्रकार उसमें बैठ कर इस बात पर चर्चा कर रहे है.

एग्जिट पोल पर हो रही चर्चा को लेकर ऐसा लग रहा है जैसे देश की सारी  समस्याएं हल हो चुकी है इधर हम चुनाव और ओपेनियन पोल में ब्यस्त रहे उधर पाकिस्तान ने हमारे दो वीरों को शहीद कर दिया पर किसी को दिखाई कहाँ देने वाला है क्योंकि एग्जिट पोल जो आ गया है जिसके पक्ष में एग्जिट पोल आया है वो जमकर ख़ुशी का इजहार कर रहा है और जिसके विपक्ष में है वो एक्जैक्ट पोल आने तक का इंतजार कर रहा है एक्जैक्ट पोल का मतलब 11 दिसम्बर 2018. 

लेकिन मैं फिर कहना चाहता हूँ ऐसा लग रहा है कि हमारा देश वास्तव में चुनावी एग्जिट पोल हो गया है जिसके भविष्य का निर्धारण एक कमरे में बैठकर कुछ चंद लोगों के ख़यालात से तय किया जा रहा है जो अफसोसजनक हीं नहीं शर्मिंदा करने वाला है हमारे लोकतंत्र के लिए एक बदनुमा धब्बा है. हमरे देश का जो शीर्ष पुरुष है उसके भाषा में कोई संस्कार नहीं है जो देश के लोगों को सोचने के लिए मजबूर होना चाहिए।

इस चुनाव से एक बात तो लगभग साफ हो गयी है कि अब राजनैतिक पार्टियां जनता के मुद्दों को कम और अपने स्वार्थ मंदिर-मस्जिद,गोत्र,बढ़िया हिन्दू,घटिया हिन्दू पर हीं बात करंगे क्योंकि यही इन्हे शोभा देता है और यही वोट भी दिलवाता है. रोजी-रोजगार की बात तो अब कहानियों में सुनाई देंगी या जब सत्ताधारी पार्टियां विपक्ष में आएंगी जब सुनाई देगी आज का युवा कितना भी पढ़-लिख ले परन्तु उसके लिए रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे है राजनितिक लिहाज से तो ठीक है ढृढ़ इस्च्छ वाला नेता चाहिए चाय बनाने वाला गरीब नेता चाहिए लेकिन युवा के लिए तो रोजगार के अवसर पैदा करने वाला नेता चाहिए क्योंकि अब हर कोई समझता है कि अच्छी से जीवन जीने के लिए अच्छा पैसा चाहिए और अच्छा पैसा सिर्फ और अच्छे रोजगार से हीं मिल सकता है न कि हिन्दू मुस्लिम करने से या एग्जिट पोल का मसाला बनाने से.     

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