राजनितिक रूप से देखा जाय तो यह वर्तमान हफ्ता बहुत ही उत्तेजनाओं से भरा रहा है. उत्तेजना मै इस लिए कह रहा हूँ कि इसी हफ्ते में मंगलवार को हिन्दी पट्टी के तीन प्रमुख राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नतीजे घोषित किये गए जो सत्ताधारी पार्टी बीजेपी हारी और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में १५ साल से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस वापस लौटी और राजस्थान तो पिछले २५ सालों से अपने चरित्र में कोई परिवर्तन न करते हुए गद्दी कांग्रेस और भाजपा के बीच आती-जाती रही जो अबकी बार भी अपने चरित्र के साथ न्याय किया, परन्तु अब जो सबसे उत्तेजना की बात हो रही है वो यह है कि कांग्रेस पार्टी को राज्य के मुखिया का चुनाव करने में शायद कठिनाई आ रही है क्योंकि आज जनता का परिणाम घोषित हुए ४८ घंटे हो गए है परन्तु कांग्रेस पार्टी अपनी तरफ से जनता को उनका नेता अब तक नहीं दे पायी है.
कांग्रेस पार्टी और उसके समर्थकों को को तो छोड़िये राजनीतिक पंडित भी नतीजे का अनुमान नहीं लगा पा रहे है और वो भी बहुत हैरान है कि क्या होगा, कैसे होगा, कौन होगा युवा होगा या अनुभव होगा टीवी डिबेट बस इन्हीं बातों में उलझा पड़ा है मैंने भी सुबह से लगभग सभी मुख्य हिंदी टीवी चैनलों को बदल-बदलकर देख रहा हूँ तो सब जगह लगभग समान बात पर चर्चा हो रही है और सभी विद्वान गण अपनी-अपनी और समझ के हिसाब से आंकलन कर रहें है परन्तु यकीनी यौर पर कोई कुछ भी ठोस तरिके से नहीं विश्लेषण कर पा रहा है. यही हाल मध्य-प्रदेश में भी है परन्तु टीवी डिबेट में उसकी चर्चा मनो भूलवश आ जा रही है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान के मुखिया और उनके कथित समर्थकों के ब्यवहार को लेकर हो रही है.
कांग्रेस द्वारा जीती गयी इन राज्यों में मुखिया को लेकर सबसे कम चर्चा छत्तीसगढ़ राज्य की हो रही भूल से कोई विश्लेषक घंटे दो घंटे में एकाध बार छत्तीसगढ़ का नाम ले लेता है आज तक के टीवी चैनल पर जो दो मुख्य विश्लेषकों वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष जी और वरिष्ठ पत्रकार श्री आलोक जी के विश्लेषण को सुनकर भी यही लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को दोनों में से एक का चयन करने में थोड़ी परेशानी हो रही है जिससे एक निर्णय आने में बहुत ज्यादा वक्त लग रहा है. अब तक कोई तस्वीर साफ-साफ़ नजर नहीं आ रही है कि राजस्थान का मुखिया कौन ? इसका सवाल जस का तस जनमानस में तैर रहीं है. राजनितिक रूप से राहुल गाँधी एक लड़ाई जीत चुके है और अब दूसरी सबसे बड़े द्वंध को लेकर फंसे हैं की मुखिया का ताज किसके सिर पर रखा जाये जिससे २०१९ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके.
अभी-अभी ब्रेकिंग न्यूज़ की तरह इ बात सामने आयी है कि राहुल गाँधी सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों को एक साथ बिठा कर बात करने लिए अपने आवास पर बुला लिया है इससे तो एक बात स्पष्ट हो रही है कि अब जल्द हीं राजस्थान के मुखिया को लेकर कोई खबर आने वाली है और दूसरी बात ये अच्छी दिख रही है कि जो संघ भाजपा हमेशा कांग्रेस पर आरोप लगाती थी कि राज्य नेतृत्व को कांग्रेस नेता थोपती थी वो यहां पर झूठा साबित हो रहा है और एक स्वस्थ्य लोकतंत्र और पार्टी के भीतर के लोकतंत्र को भी दर्शा रहा है.
अब तक राजस्थान के मुखिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है........
bahut rode hai is raah me Sachin ji
ReplyDeletesb bina baat ke bwal kaat rhe hai
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