दो दिन काशी में रुकने बाद साहेब को ये अनुभूति तो हो हीं चुकी होगी कि काशी कितना क्योटो बना और साहेब शायद अस्सी घाट पर जरूर गए होंगे जहाँ गंगा मैय्या के बुलावे पर गुजरात से आये थे अगर गए होंगे तो ये भी देख ही लिया होगा कि कितनी साफ-सफाई है घाटों पर सभी ब्यवस्थायें सुचारु रूप से कार्य कर रही होंगी। ये सब देखने के बाद शायद साहेब रविदास पार्क की तरफ नहीं गए होंगे जिसके दाहिनी तरफ गंदे नाले का पानी आज भी माँ गंगा में जा रहा है शायद साहेब को किसी ने बताया नहीं होगा वर्ना साहेब वहाँ जरूर जाते और फोटो खिचवाते क्योकि फोटोग्राफी का शौक जो ठहरा,ये शौक बड़ा कमाल का होता है जिस किसी इंसान को फोटोग्राफी "जिसे आप सेल्फी के नाम से जान सकते है" का शौक लग जाये तो वो साफ जगह पर भी कूड़ा डलवा कर झाड़ू लगाने लगता है.
अरे मै किस बात में उलझ गया मै तो बात क्योटो और काशी की कर रहा था तो हाँ हमारे काशी को जितना हमारे सांसद महोदय "प्रधानमंत्री" जी ने समझ लिया उतना तो हमारी कई पीढ़ियां काशी में रह कर भी नहीं समझ पायी,वाकई कमाल की समझ है हमारे साहेब की,हमारे बुजुर्ग यह कहते-कहते मर गए कि बेटा ये अड़भंगी,डमरू धारी आशुतोष की धरती है जिनकी लीला तो स्वयं काल भी नहीं समझ पाता है परन्तु साहेब तो काल से भी आगे निकल गए और काशी को समझ गए और क्योटो बनाने की सोच ली.भाई सोच ली तो सोच ली उसमे मेरा क्या जाता है,नहीं दोस्त मेरा बहुत कुछ जाता है क्योटो बनाने के चक्कर में हमारी हजारों साल की जो विरासत है कहे तो पक्के घाट पर पत्थरों से बने महल और मकान हैं उनको तोडा जा रहा है,अस्सी घाट पर हीं हजारों साल पहले के मंदिर बने है उनको तोडा जा रहा है,काशी के संत-महात्माओं का तो यहां तक मानना है कि जो मंदिर तोड़े जा रहे है उसे वास्तु-शास्त्र के अनुसार बनाया गया है और ये भी कहा जाता है कि उसमें से एक भी मंदिर टूटा तो उसका परिणाम भयावह होगा.
साहेब तो कैंट जरूर गए होंगे जहाँ पर पूरा का पूरा पुल टूट कर गिर गया था बहुत लोग मारे गए थे उस घटना में तब साहेब विदेश में थे वहीं से ट्वीटियाये थे तो काशी पहुंचने पर साहेब मृतकों के घर भी गए होंगे और उनके दुःख को साझा भी किया होगा कि कैसे मृतकों के परिजनों से पोस्टमार्टम के बाद पैसे भी मांगे जा रहे थे,ऐसा घिनौना करतूत देख साहेब बोले थे कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाई की जाएगी पर क्या हुआ पता नहीं अरे उसी समय तो बाबा जी "योगी" भी गए थे पर क्या हुआ पता नहीं। ठेकेदार कौन था ये भी पता नहीं चला तो साहेब ये हमारे बुढऊ बाबा का नहीं दुसरके बाबा का कमाल था,शायद सपने में काशी को क्योटो बनाने का यह प्रमाण है.
आप काशी को क्योटो बनाने के चक्कर में बाबा भोले की नगरी को उजाड़ देने पर लगे है,अरे भैय्या कोई तो अपनी बात साहेब तक पहुचाओ कि पहले गंगा मैय्या को साफ़ कर लो फिर और कुछ करना और मेरे जैसे बहुत लोग चाहते है कि हमारी पहचान काशी से है उसकी तुलना तो साहेब वाले क्योटो से कउनो कीमत पर नहीं हो सकती है,हमारे बाबा विश्वनाथ "प्यार से बुढ़ऊ बाबा "की कृपा से हम सब बहुते सुखी और खुश है,बस साहेब उन मंदिरवन को टूटने से बचाय लो,बाकी घाट,सांड़,सन्यासी इह बुढ़ऊ के नगरी के भक्त हैं.
काशी के गौरव में कुछ शब्द-
पत्थर और घाटों की नक्काशी है काशी
भक्ति और मोक्ष की राजधानी है काशी
बाबा विश्वनाथ की प्यारी नगरी है काशी
राजा बनारस की आन और बान है काशी
बी एच यु और लंका की पहचान है काशी
बहरे की कान,गूंगे की आवाज है काशी
मलदहिया,मैदागिन की शाम है काशी
चहूँ दिसि का अभिमान है काशी
गंगा की अविरल धारा है काशी
करोंडो जीवों का निवास है काशी
डमरू वाले बाबा का घर है काशी
अविनाशी शिव का धाम है काशी
शिव भक्तों की शान है काशी
साँड़,संत,सन्यासी का मान है काशी
ॐ नमः शिवाय
जय हो त्रिलोचन महादेव
ye to aapne bahut bdiya likha mere ghr whi hai sb kuda kuda faila rhta hai ghaton ke upr
ReplyDeletehaa bna
ReplyDeleteSb bkwas hai bhaiyaa
ReplyDelete#Feku is faking always
ReplyDeleteमैं काशी में हूँ बहुत ज्यादा असर नहीं है पहले और अब में मैं अक्सर जाता रहता हूँ गंगा आरती के लिए
ReplyDeleteNever
ReplyDeletesb bkwas hai
ReplyDeletekbhi nhi Om Har Har Bhole
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