तीनो हिंदी भाषी राज्यों के विजेता दल की घोषणा हुए आज तीन दिन बीत चुके है परन्तु कांग्रेस के लिए यह बहुत हीं बड़ा सिरदर्द सब्त हो रहा है तीन दिनों के बाद भी कांग्रेस इन राज्यों में उनके मुखिया का चेहरा दे सकने में अब तक काबिल नहीं हो पायी है. देर-सबेर कल अर्धरात्रि में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम कमलनाथ के रूप में घोषित किया गया और वो भी बहुत कड़ी मशक्कत के बाद हीं ऐसा हो पाया क्योंकि वहां सिंधिया घराने के वारिस ने कमलनाथ के सामने अपनी तगड़ी दावेदारी की पेश की छत्तीसगढ़ में मामला अपेक्षाकृत शांत रहा.
लेकिन सबसे बड़ी परेशानी कांग्रेस के लिए राजस्थान के नेतृत्व को लेकर रार ठनी हुई है एक तरफ दिग्गज और अनुभवी दो बार के राजस्थान के रह चुके अशोक गहलोत है तो दूसरी तरफ युवा और साढ़े चार साल तक राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट है जिन्हें लेकर युवाओं के बीच एक अलग तरह का उत्साह और समर्थन देखने को मिल रहा है. इन्हीं दोनों के नाम को लेकर कांग्रेस का आलाकमान किसी पेंडुलम की भाँति कभी इधर कभी उधर झूल रहा है और अंदरखाने तो बात ये भी तैर रही है कि सचिन पायलट अपनी दावेदारी को लेकर अड़ गए है और अशोक गहलोत के लिए कोई जगह नहीं छोड़ना चाहते है और हो भी क्यों न बंदे ने साढ़े चार साल तक राजस्थन के एक-एक खाक छानी है गांव से लेकर शहर तक मृत पड़े संगठन को जीवित करने के लिए बहुत परिश्रम और तपस्या की है जरूरत पड़ने पर लाठियां भी खाई है, तो अब जब परिणाम उनकी मेहनत के अनूकूल आया है तो मलाई किसी और को कैसे खाने देंगे।
अब सबकी नजरें दस जनपथ और कांग्रेस के दिल्ली स्थित हेड क़्वार्टर पर आकर रूक चुकी है कि यहां आलाकमान से क्या फरमान जारी किया जाता है और जो भी फैसला होगा उसे सबको मानना पड़ेगा और एक पक्ष अपना मन मसोस कर रह जायेगा क्योंकि अभी इनके सामने कोई और रास्ता नहीं होगा और ये पार्टी से बगावत कर सकें ऐसी स्तिथि में भी नहीं है क्योंकि जो जनादेश है वो आंशिक रूप से हीं सही अल्पमत में है किसी के भी समर्थक थोक के भाव में जीत कर विधान सभा में नहीं पहुंचे है जिससे ये लोग वाकिफ है.
जहां तक मैं समझता हूँ कि मायूसी सचिन पायलट के हाथ लगेगी क्योंकि इस बार राजस्थान कांग्रेस में सी पी जोशी जैसे बहुत वरिष्ठ नेता चुनाव जीत कर आए हैं जो अपने से कनिष्ठ सचिन पायलट के साथ कार्य करने में कतराएंगे और यही बातें सचन के खिलाफ जा सकती है परन्तु कांग्रेस को उनकी महत्वाकांक्षाओं का ख्याल रखना चाहिए और युवाओं के इस आवाज सचिन पायलट को किसी भी तरिके से संतुष्ट करते हुए फैसला करना चाहिए जिससे २०१९ के आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके.
sdko pr ldai aa rhi hai ye congress ke liye sharm kee baat hai
ReplyDeletemjak bna diya hai congress ka in netaon ne to
ReplyDeleteye aaps me hee ldte rhenge or bjp jeet jayegi
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