कांग्रेस ने तीन राज्यों में शानदार जीत के बाद अब मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला करने के लिए तीनों राज्यों में बहुत मुश्किल हो रहा है क्योकि कांग्रेस के पास तीनों राज्यों में बहुत हीं सक्षम नेता है जिसमें से एक को चुनने में बहुत समस्या आ रही है ये राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट, मध्य-प्रदेश में कमलनाथ जी और ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टी एन सिंह देव जैसे मजबूत नेता है और बहुत हीं प्रभावी तरिके से अपने-अपने क्षेत्र में बहुत हीं बढ़िया कार्य किये और कर भी रहें हैं इसलिए किसी एक चेहरे को चुनना कांग्रेस आलाकमान के लिए थोड़ा मुश्किल लग रहा है.
अभी राजस्थान से खबर आ रही है कि विधायकों की बैठ ११ बजे से तकरीबन साढ़े पांच घंटे से चल रही है परन्तु अभी तक मुख्यमंत्री के चेहरे पर किसी के नाम का निर्णय नहीं किया जा सका है क्योंकि अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों बहुत हीं मुख्यमंत्री पद के शसक्त उम्मीदवार है और इसीलिए उनके समर्थक भी सड़कों पर आ डटे हैं और अपने-अपने पसंद के नाम के साथ जयकारे का नारा लगा रहें है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि कांग्रेस में अनुशासन की कमी है अन्यथा ये बड़े नेता अपने समर्थकों को शांति रखने की अपील भी कर सकते थे जो देखने को नहीं मिल रहा है.
पार्टी में कई मुख्यमंत्री पद के काबिल नेता का होना कांग्रेस पार्टी के लिए फायदेमंद भी है तो कई बार इसका गलत असर भी देखने को मिलता है. अगर ये समर्थक सड़कों पर उत्साह में नारेबाजी न करते तो भी उनके पसंदीदा नेता का सम्मान होता और इन अति-उत्साही कार्यकर्ताओं को भी समझना चाहिए कि मुख्यमंत्री तो एक हीं होता है एक से ज्यादा नहीं होता, परन्तु दुसरे नजरिये से देखा जाये तो कांग्रेस के लिए ये गर्व की बात है कि उसकी पार्टी में दूसरी पीढ़ी के युवा नेता भी है जो मुख्यमंत्री बनने का पूरा दमखम रखते है इस स्तिथि को देखकर निश्चित तौर पर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व खुश होगा और ये सोच रहा होगा कि हमारी बगिया में कुछ ऐसे पेड़ भी है जो समय आने पर दूसरों को भी छाया प्रदान कर सकते है.
बात अगर मध्य-प्रदेश की करें तो यहां पर कांग्रेस के पास एक से अधिक काबिल चेहरे है जैसे पार्टी के तत्कालीन प्रदेश और वरिष्ठ नेता श्री कमलनाथ जी, दो बार के मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके श्री दिग्विजय सिंह, युवा और सिंधिया और राजघराने के वारिस श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, किसान नेता श्री अरुण यादव जी, श्री अजय सिंह जी और भी कई काबिल नेता है और इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस की झोली में अनेक बेशकीमती हीरे है और कांग्रेस की शोभा बढ़ा रहें हैं.
इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री पद की लड़ाई को देखकर ऐसा लगता है कि कांग्रेस की बेल की जड़ें बहुत गहरी है और मैंने तो वो दौर देखा नहीं है पर किताबों में थोड़ा बहुत पढ़ा हूँ देश की आजादी की बाद देश के दो शीर्ष नेता थे एक सरदार पटेल जी जो संगठन पर पकड़ रखते थे और दुसरे पंडित जवाहर लाल नेहरू जी थे जो जनता के बीच में बहुत लोकप्रिय थे परन्तु महात्मा गाँधी ने नेहरू जी को देश के बागडोर की जिम्मेदारी सौपी थी, कुछ उसी तरह का दृश्य कांग्रेस में इस बार देखने को मिल रहा है.
good note
ReplyDeletebahut bdhiya likha aapne bhai saheb
ReplyDeletekitne neta hai bhai ?
ReplyDeletegood sign for congress party
ReplyDeleteinse kuchh na ho payega
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